
मैसूरु दशहरा में पहली बार कंबाला दौड़ (Img: Dynamite News)
Mysuru: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की पहल पर विश्व प्रसिद्ध मैसूरु दशहरा उत्सव में पहली बार तटीय कर्नाटक की पारंपरिक भैंसा दौड़ ‘कंबाला’ का आयोजन किया गया। इस पहल का मकसद राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाना और नई पीढ़ी को कर्नाटक की विविध संस्कृति से परिचित कराना बताया गया है। हालांकि, दशहरा में इस पारंपरिक खेल को शामिल करने के फैसले पर विरोध भी सामने आया है।
मैसूरु जिले के प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने रविवार को सथागल्ली स्थित वीटीयू कॉलेज के पास आयोजित कंबाला दौड़ को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की पहल पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
यतींद्र सिद्धारमैया ने उम्मीद जताई कि जिस तरह मैसूरु दशहरा को दुनियाभर में पहचान मिली है, उसी तरह कंबाला को भी वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। इस आयोजन के जरिए तटीय कर्नाटक की परंपरा को राज्य के एक बड़े सांस्कृतिक मंच पर लाने की कोशिश की गई है।
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इस आयोजन में तटीय क्षेत्र, खासकर दक्षिण कन्नड़ जिले से 150 से अधिक भैंसों की जोड़ियां पहुंचीं। बड़ी संख्या में पशुओं और दर्शकों के आने को देखते हुए जिला प्रशासन ने जरूरी इंतजाम किए। मंत्री के मुताबिक, दौड़ में हिस्सा लेने वाले पशुओं के लिए पर्याप्त चारे, भोजन और पशु चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था की गई। दर्शकों और खेल प्रेमियों की सुविधा के लिए भी बुनियादी इंतजाम किए गए।
मुख्यमंत्री की पहल पर हुए इस आयोजन को लेकर कुछ लोगों और संगठनों ने आपत्ति जताई। मैसूरु शाही परिवार के सदस्य और सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार समेत कई नेताओं और संगठनों का कहना है कि कंबाला तटीय कर्नाटक की अलग सांस्कृतिक परंपरा है और इसे मैसूरु दशहरा में शामिल करना उत्सव की विरासत, पहचान और धार्मिक महत्व के अनुरूप नहीं है।
इस तरह, जहां सरकार की ओर से इसे सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने की पहल के रूप में पेश किया गया, वहीं विरोध करने वालों ने उत्सव की पारंपरिक पहचान को लेकर सवाल उठाए।
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कंबाला की परंपरा करीब 600 से 700 साल पुरानी मानी जाती है। इसकी शुरुआत तुलु नाडु क्षेत्र में हुई थी। फसल कटाई के बाद आयोजित होने वाली इस भैंसा दौड़ का संबंध मनोरंजन और देवताओं के प्रति आभार जताने की परंपरा से भी रहा है। मैसूरु दशहरा में पहली बार कंबाला को शामिल करने की पहल ने इस पारंपरिक खेल को नया मंच दिया है।
Location : Mysuru
Published : 18 October 2026, 5:25 PM IST