
बसपा प्रमुख मायावती (Source: X)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की सियासत में चुनावी हलचल के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि निम्न वर्ग के लोगों को निजी क्षेत्र की नौकरियों में भी उसी तरह आरक्षण मिलना चाहिए, जिस तरह सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाता है।
मायावती ने आरोप लगाया कि सत्ता और विपक्ष के संघर्ष के बीच निम्न वर्ग के लोगों को दोबारा गुलाम बनाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर बसपा का रुख स्पष्ट किया।
मायावती ने कहा कि रोजगार के अवसरों में सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भी बड़ी भूमिका है। ऐसे में निजी कंपनियों और संस्थानों में भी निम्न वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है।
बसपा प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं। मायावती का आरक्षण पर जोर पार्टी की चुनावी रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लखनऊ: बसपा प्रमुख मायावती प्रेस वार्ता में बोलीं- हमारी पार्टी चाहती है कि प्राइवेट क्षेत्र की नौकरियों में भी निम्न तबके के लोगों उसी तरह आरक्षण मिलना चाहिये, जिस तरह उनको सरकारी नौकरियों में मिलता है।@bspindia @Mayawati #Reservation #PrivateSectorJobs pic.twitter.com/wU4jYOljXL
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) August 11, 2026
मायावती हाल के दिनों में आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर लगातार अपनी राय रख रही हैं। रविवार को उन्होंने एससी और एसटी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ को लेकर चल रही बहस का विरोध किया था। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था में बदलाव के खिलाफ अपना रुख दोहराते हुए इसे सामाजिक न्याय के संवैधानिक उद्देश्य से जोड़कर देखा।
इससे पहले अप्रैल में मायावती ने महिला आरक्षण को लेकर भी कहा था कि एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के भीतर अलग प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
लखनऊ: बसपा प्रमुख मायाबती बोलीं- सत्ता और विपक्ष के संघर्ष में निम्न वर्ग के लोगों को दोबारा गुलाम बनाने की साजिश रची जा रही है।@bspindia @Mayawati #DalitRights #IndianPolitics pic.twitter.com/qiQd2ixwXg
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मायावती के ताजा बयान में भी सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को केंद्र में रखा गया है। निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग के जरिए बसपा रोजगार और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को राजनीतिक बहस में आगे बढ़ाना चाहती है।
मायावती इससे पहले भी गरीब, मजदूर, किसान और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दे उठाती रही हैं। मई में उन्होंने महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा था और गरीब व मध्यम वर्ग को राहत देने की मांग की थी।
निजी क्षेत्र में आरक्षण का मुद्दा आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है। सरकारी नौकरियों के मुकाबले निजी क्षेत्र में रोजगार का दायरा बड़ा होने के कारण मायावती की यह मांग रोजगार और सामाजिक प्रतिनिधित्व के सवाल को एक साथ जोड़ती है।
अब देखना होगा कि अन्य राजनीतिक दल मायावती की इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या यह मुद्दा आगामी यूपी चुनाव की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बनता है।
Location : Lucknow
Published : 11 August 2026, 1:04 PM IST