यूपी कांग्रेस की कमान मोना के हाथ, संगठन से गठबंधन तक कई चुनौतियां; जनाधार बढ़ाना पहली परीक्षा

उत्तर प्रदेश कांग्रेस की कमान आराधना मिश्रा ‘मोना’ को मिलने के बाद 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने कई चुनौतियां हैं। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के साथ सपा के साथ गठबंधन और सीट बंटवारे में तालमेल बनाना मोना के लिए अहम परीक्षा होगी। पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और कांग्रेस के जनाधार को बढ़ाने की चुनौती भी उनके सामने है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 October 2026, 1:38 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया है। उन्होंने अजय राय की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। चुनाव से कुछ महीने पहले हुए इस बदलाव के बाद अब मोना के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन को जमीन पर मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में लाने की होगी। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में तालमेल और सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस की भूमिका भी उनके लिए अहम मुद्दा होगी।

कम समय में संगठन को चुनाव के लिए तैयार करना

आराधना मिश्रा ‘मोना’ के सामने सबसे पहली चुनौती कांग्रेस के संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की है। पार्टी लंबे समय से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर है। ऐसे में चुनावी मैदान में उतरने से पहले कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर संगठन की मौजूदगी मजबूत करना आसान काम नहीं होगा। मोना ने नई जिम्मेदारी संभालने के बाद संगठन को मजबूत करना और सामूहिकता के साथ काम करना अपनी प्राथमिकताओं में बताया है।

सपा के साथ गठबंधन और सीट शेयरिंग बड़ी परीक्षा

2027 के चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की तस्वीर भी मोना के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष ने गठबंधन को लेकर किसी तरह के संशय से इनकार किया है और कहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि सीट शेयरिंग की तस्वीर नवरात्रि तक साफ हो सकती है।

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अजय राय के बाद बदली रणनीति

आराधना मिश्रा मोना की नियुक्ति के साथ ही अजय राय का प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल खत्म हो गया। अजय राय ने अपने कार्यकाल में संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर दिया था। पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं से कांग्रेस और राहुल गांधी को मजबूत करने की अपील की और कहा कि पार्टी में सभी एक परिवार की तरह हैं। उन्होंने मोना को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई भी दी।

कार्यकर्ताओं की नाराजगी और उम्मीद दोनों संभालनी होंगी

कांग्रेस के सामने सिर्फ संगठन खड़ा करने की चुनौती नहीं है, बल्कि कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाने की भी जरूरत होगी कि पार्टी गठबंधन में अपनी राजनीतिक जमीन और पहचान को बनाए रखेगी। गठबंधन में किसी सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार हो या सहयोगी दल का, चुनाव के दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं को उसी रणनीति के तहत काम करना होगा। ऐसे में सीटों के बंटवारे के बाद असंतोष को संभालना और संगठन को एकजुट रखना मोना की नेतृत्व क्षमता की परीक्षा होगी।

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मोना ने बताया अपना एजेंडा

प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद आराधना मिश्रा मोना ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए केवल पद नहीं बल्कि पार्टी की विचारधारा और विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प है। उन्होंने संगठन को अधिक मजबूत बनाने और जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा, समर्पण और सामूहिकता के साथ निभाने की बात कही।

‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर भी कांग्रेस का हमला

मोना ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों में जेल भेजे गए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की जमानत को न्याय की जीत बताया है। उन्होंने भाजपा पर वोट चोरी के आरोप लगाए और कहा कि राहुल गांधी पहले ही इस मुद्दे को उठा चुके हैं। हालांकि वोट चोरी से जुड़े आरोप राजनीतिक दावे हैं और इन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए।

Location :  Lucknow

Published :  4 October 2026, 1:38 PM IST