महिलाओं में टीबी अब साइलेंट किलर बनती जा रही है। इसके लक्षण अस्पष्ट होते हैं, प्रजनन अंग प्रभावित होते हैं, और समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जागरूकता, सही डायग्नोसिस और पूरा इलाज जरूरी है।

टीबी अब महिलाओं में साइलेंट किलर के रूप में उभर रही है। इसके लक्षण अक्सर अस्पष्ट होते हैं, जिससे बीमारी लंबे समय तक छिपी रहती है। समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह जानलेवा हो सकती है। हवा के जरिए फैलने वाला यह बैक्टीरियल इंफेक्शन खांसी, छींक या थूक के माध्यम से दूसरों तक पहुंचता है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
महिलाओं में टीबी का एक खास रूप फीमेल जेनिटल टीबी होता है, जो प्रजनन अंगों को प्रभावित करता है। इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होने के कारण कई बार महिलाओं को पता ही नहीं चलता। समय पर इलाज न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकता है और बांझपन या अन्य प्रजनन समस्याओं का कारण बन सकता है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
फीमेल जेनिटल टीबी फेलोपियन ट्यूब, गर्भाशय, ओवरी और सर्विक्स को प्रभावित कर सकती है। सबसे अधिक असर फेलोपियन ट्यूब पर होता है, जिससे गर्भधारण मुश्किल हो जाता है। असामान्य पीरियड्स, पेल्विक पेन और डिस्चार्ज जैसी सामान्य समस्याएं अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
टीबी के लक्षणों में बुखार, रात में पसीना, वजन कम होना और भूख न लगना शामिल हैं। कमजोर इम्यूनिटी, डायबिटीज, HIV, खराब जीवनशैली और पोषण की कमी इसे तेजी से बढ़ाते हैं। भीड़भाड़ वाले इलाके और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी इसके फैलाव का बड़ा कारण हैं। समय रहते पहचान से गंभीर परिणाम टाले जा सकते हैं।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
टीबी का इलाज संभव है, लेकिन पूरा एंटीबायोटिक कोर्स लेना जरूरी है। समय पर इलाज न मिलने पर यह न केवल प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी खराब करता है। महिलाओं में जागरूकता, सही डायग्नोसिस और पोषण सुधार इसके नियंत्रण में मदद कर सकते हैं।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)