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सुलतानपुर। गोमती नदी का किनारा कभी सिर्फ सुकून और प्रकृति के लिए नहीं जाना जाता था। करीब डेढ़ दशक पहले इसी किनारे कुछ इंजीनियरिंग छात्रों ने एक ऐसा सपना देखा, जिसने आज सैकड़ों बच्चों की जिंदगी बदल दी है। न कोई बड़ा भवन था, न आधुनिक सुविधाएं और न ही महंगे संसाधन। बस एक चटाई, कुछ किताबें और बच्चों को पढ़ाने का जुनून। इसी छोटे से प्रयास का नाम था ‘कोशिश’।
Published : 5 September 2026, 7:51 AM IST