
रिश्वतखोरी फोटो सोर्स-Google
New Delhi: आखिर क्यों खत्म नहीं हो रही रिश्वतखोरी? कानून सख्त, फिर भी सरकारी काम के लिए पैसे देने को मजबूर क्यों हैं लोग?
भारत में रिश्वतखोरी की समस्या को समझने के लिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि कितने सरकारी कर्मचारी पकड़े गए। असली सवाल यह है कि आखिर ऐसी व्यवस्था क्यों बनी रहती है, जिसमें किसी का काम समय पर कराने, फाइल आगे बढ़वाने, लाइसेंस लेने या अपने अधिकार की सेवा पाने के लिए भी अतिरिक्त पैसे देने की नौबत आ जाती है। जब रिश्वत लेना अपराध है, जांच एजेंसियां मौजूद हैं और भ्रष्टाचार रोकने के लिए कानून भी हैं, तो फिर यह समस्या बार-बार सामने क्यों आती है?
इस सवाल की पड़ताल में तीन महत्वपूर्ण पहलू सामने आते हैं, सरकारी प्रक्रियाओं में मौजूद खामियां, भ्रष्टाचार करने वालों को सजा मिलने की अनिश्चितता और समाज में रिश्वत को लेकर विकसित होती स्वीकार्यता। Transparency International के आंकड़े, हालिया भ्रष्टाचार मामलों और सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले से इस समस्या की जटिलता समझने में मदद मिलती है।
Transparency International की फरवरी 2026 में जारी Corruption Perceptions Index (CPI) 2025 में भारत को 100 में 39 अंक मिले और 182 देशों में 91वां स्थान मिला। इस सूचकांक में अधिक अंक का अर्थ सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की कम धारणा है। हालांकि, यह रैंकिंग रिश्वतखोरी की वास्तविक घटनाओं की गिनती नहीं करती, बल्कि विशेषज्ञों और कारोबारियों के आकलन पर आधारित होती है।
Transparency International के भारत संबंधी पृष्ठ पर उपलब्ध Global Corruption Barometer के आंकड़ों के मुताबिक, 89 प्रतिशत लोगों ने सरकारी भ्रष्टाचार को बड़ी समस्या माना था, जबकि 39 प्रतिशत सार्वजनिक सेवाओं का इस्तेमाल करने वालों ने पिछले 12 महीनों में रिश्वत देने की बात कही थी। ये आंकड़े 2020 के एशिया सर्वेक्षण से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें 2026 की मौजूदा स्थिति का प्रत्यक्ष माप नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी, ये बताते हैं कि आम नागरिकों के सरकारी सेवाओं से जुड़े अनुभव भ्रष्टाचार की बहस में महत्वपूर्ण हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि देश में हर सरकारी विभाग या कर्मचारी भ्रष्ट है। सवाल उन व्यवस्थागत कमजोरियों का है, जिनके कारण रिश्वतखोरी के अवसर बनते हैं और कई बार उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।
जब अधिकार की सेवा भी एहसान बन जाए,रिश्वतखोरी की एक बड़ी वजह तब पैदा होती है, जब किसी सामान्य सरकारी काम के लिए नागरिक को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। मान लीजिए, किसी व्यक्ति को प्रमाणपत्र बनवाना है, जमीन से संबंधित रिकॉर्ड ठीक कराना है या किसी सरकारी योजना का लाभ लेना है। यदि प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है, समयसीमा तय नहीं है और आवेदन की स्थिति जानने का आसान तरीका उपलब्ध नहीं है, तो वह बिचौलियों के संपर्क में आ सकता है।
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ऐसी स्थिति में रिश्वत केवल पैसे की मांग नहीं रह जाती, बल्कि काम जल्दी कराने का अनौपचारिक रास्ता बन जाती है। जहां किसी अधिकारी के पास पर्याप्त विवेकाधिकार हो, निर्णय के कारण स्पष्ट न हों और शिकायत का समाधान कमजोर हो, वहां इस तरह के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।
यह सवाल भी जरूरी है कि अगर रिश्वत देना गलत है, तो लोग पैसे क्यों देते हैं? इसका जवाब हर मामले में एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग नियम तोड़कर अपना काम जल्दी करवाना चाहते हैं। कुछ लोग अनुचित लाभ हासिल करने के लिए पैसे देते हैं। लेकिन कई मामलों में नागरिक का दावा होता है कि उससे वैध सेवा देने के बदले पैसे मांगे गए या काम रोकने का दबाव बनाया गया। इसलिए रिश्वत देने वाले हर व्यक्ति को एक ही श्रेणी में रखना सही नहीं है। भ्रष्टाचार के पीछे स्वेच्छा से अनुचित लाभ लेने और दबाव में पैसे देने के बीच अंतर करना जरूरी है। कानून भी इस अंतर को पहचानता है।
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किसी भ्रष्ट कर्मचारी के पकड़े जाने से एक मामले में कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन व्यापक बदलाव के लिए यह भी जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो, मुकदमा समय पर चले और दोष सिद्ध होने पर सजा प्रभावी ढंग से लागू हो। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि शिकायत होने पर भी जांच वर्षों तक चल सकती है या मामला सबूतों की कमी के कारण कमजोर पड़ सकता है, तो केवल सजा का प्रावधान पर्याप्त निवारक साबित नहीं होता। यह एक व्यवस्थागत चुनौती है, हालांकि हर मामले में देरी या कमजोर जांच को भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं माना जा सकता Transparency International की भारत संबंधी समीक्षा में भी जवाबदेही से जुड़ी संस्थाओं, जांच और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं दर्ज हैं।
भारत में भ्रष्टाचार रोकने के लिए Prevention of Corruption Act, 1988 लागू है, जिसमें 2018 में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। इस कानून में सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत लेने के साथ-साथ रिश्वत देने और व्यावसायिक संगठनों के माध्यम से रिश्वत देने से जुड़े अपराधों के प्रावधान भी हैं।
Location : New Delhi
Published : 25 October 2026, 2:16 PM IST