हिमाचल में आरडीजी पर अगला कदम क्या? विशेष सत्र को लेकर स्थिति साफ नहीं, जानिये क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल

केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी खत्म किए जाने के फैसले पर हिमाचल सरकार विशेष सत्र बुलाना चाहती थी, लेकिन राज्यपाल ने इसे मंजूरी नहीं दी। लोकभवन ने बजट सत्र बुलाने का सुझाव दिया है। इससे सरकार और राजभवन के बीच तनाव बढ़ने के संकेत हैं।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 7 February 2026, 11:59 AM IST

Shimla: केंद्रीय बजट में राज्यों के लिए दिए जाने वाले राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का प्रावधान समाप्त किए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे पर हिमाचल सरकार द्वारा विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिली है। लोकभवन की ओर से इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए सरकार को बजट सत्र बुलाने का सुझाव दिया गया है।

लोकभवन में राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष के बीच चर्चा

शुक्रवार सुबह विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया स्वयं लोकभवन पहुंचे और राज्यपाल से विशेष सत्र के प्रस्ताव पर चर्चा की। यह बैठक करीब आधे घंटे तक चली। लोकभवन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार राज्यपाल ने कहा कि यह समय बजट सत्र का है और इसी सत्र के दौरान आरडीजी से जुड़ा प्रस्ताव लाया जा सकता है। ऐसे में अलग से विशेष सत्र बुलाने की आवश्यकता नहीं है।

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सरकार ने बताया विशेष सत्र को जरूरी

बैठक के दौरान सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि आरडीजी समाप्त करने का फैसला हिमाचल प्रदेश के हितों के खिलाफ है और इसका विरोध दर्ज कराने के लिए विशेष सत्र बुलाना आवश्यक है। सरकार का कहना है कि इस विशेष सत्र के माध्यम से विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, ताकि आरडीजी को समाप्त करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जा सके।

राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा गहरा असर

सरकार का तर्क है कि आरडीजी बंद होने से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। यह अनुदान राज्य के बजट संतुलन में अहम भूमिका निभाता रहा है। इसके समाप्त होने से विकास योजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और कर्मचारियों से जुड़े खर्चों पर असर पड़ने की आशंका है। इसी कारण सरकार इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में व्यापक चर्चा चाहती है।

सरकार और लोकभवन के बीच बढ़ सकता है टकराव

विशेष सत्र को मंजूरी न मिलने से सरकार और लोकभवन के बीच खिंचाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान देने से परहेज किया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने विशेष सत्र को बताया जनता के हित में

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विधानसभा का विशेष सत्र हिमाचल की जनता के हितों को ध्यान में रखकर बुलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि केंद्र सरकार ने हिमाचल को क्या दिया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि करों में हिस्सेदारी हर साल बढ़ती है, लेकिन आरडीजी जैसी विशेष ग्रांट, जो 72 वर्षों से मिल रही थी, उसे बंद कर दिया गया है।

भाजपा पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप

मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा पर सोशल मीडिया के माध्यम से गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह सत्र राज्य की आर्थिक स्थिति और आरडीजी ग्रांट बंद करने के मुद्दे पर केंद्रित होगा। उन्होंने भाजपा विधायकों से भी अपील की कि वे विशेष सत्र में सहयोग करें और अपनी बात सदन में रखें।

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आगे क्या करेगी सरकार?

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार राज्यपाल के सुझाव के अनुसार बजट सत्र बुलाती है या विशेष सत्र के मुद्दे पर दोबारा पहल करती है। फिलहाल आरडीजी को लेकर यह विवाद हिमाचल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

Location : 
  • Shimla

Published : 
  • 7 February 2026, 11:59 AM IST