Peace Bond क्या है? अभिजीत दिपके को 6 दिन बाद फिर क्यों साइन करना पड़ा मुचलका?

दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके का मामला एक बार फिर चर्चा में है। 11 अक्टूबर को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर पीस बॉन्ड साइन कर रिहा हुए दीपके को 16 अक्टूबर को फिर हिरासत में लिया गया।

Updated : 18 October 2026, 6:27 PM IST
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नई दिल्ली: दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके का मामला एक बार फिर चर्चा में है। 11 अक्टूबर को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर पीस बॉन्ड साइन कर रिहा हुए दिपके को 16 अक्टूबर को फिर हिरासत में लिया गया। इसके बाद 17 अक्टूबर को उन्हें एक और पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पीस बॉन्ड क्या होता है, इसे साइन करने के बाद भी किसी व्यक्ति को दोबारा हिरासत में क्यों लिया जा सकता है और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में इसे लेकर क्या प्रावधान हैं?

क्या होता है Peace Bond?

पीस बॉन्ड यानी शांति मुचलका एक कानूनी आश्वासन है, जिसके तहत किसी व्यक्ति से निर्धारित अवधि तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार का वचन लिया जा सकता है। इसका उद्देश्य संभावित शांति भंग होने की स्थिति को रोकना है। यह किसी अपराध में दोषी ठहराए जाने के बाद मिलने वाली सजा नहीं, बल्कि एहतियाती कानूनी प्रक्रिया है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट को पर्याप्त आधार मिलने पर ऐसे व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने की मांग करने का अधिकार है, जिससे शांति भंग होने की आशंका हो। इस प्रावधान के तहत बॉन्ड की अवधि अधिकतम एक साल हो सकती है। हालांकि, इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।

पहले बॉन्ड के बाद दोबारा हिरासत क्यों?

जानकारी के अनुसार,दिपके ने 11 अक्टूबर को 50 हजार रुपये का जमानती पीस बॉन्ड दिया था। इसके बाद 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित 'लेहरा दो तिरंगा' मार्च में शामिल होने जाते समय उन्हें फिर हिरासत में लिया गया। पुलिस ने इस मामले में BNSS की धारा 126 और 170 के तहत निवारक कार्रवाई की। 17 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद उन्हें दोबारा बॉन्ड साइन करने पर रिहा किया गया।

यहां समझना जरूरी है कि पहले पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से किसी व्यक्ति को हर परिस्थिति में दोबारा हिरासत में लिए जाने से कानूनी छूट नहीं मिल जाती। BNSS की धारा 170 के तहत पुलिस कुछ निर्धारित परिस्थितियों में संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए निवारक गिरफ्तारी कर सकती है, यदि उसे अपराध की योजना की जानकारी हो और उसे अन्य तरीके से रोकना संभव न हो। लेकिन कार्रवाई के लिए कानून में निर्धारित शर्तें पूरी होना जरूरी है।

क्या पीस बॉन्ड तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई?

BNSS की धारा 141 के तहत, यदि विधिवत लागू शांति मुचलके के उल्लंघन की पुष्टि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होती है, तो संबंधित व्यक्ति को बॉन्ड की अवधि समाप्त होने तक हिरासत में रखने का आदेश दिया जा सकता है। हालांकि, किसी मामले में यह तय करने के लिए कि बॉन्ड का उल्लंघन हुआ या नहीं, संबंधित आदेश और कार्यवाही के रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

दिपके के मामले में उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं होता कि दूसरा बॉन्ड पहले बॉन्ड के कथित उल्लंघन पर कार्रवाई के तहत लिया गया था या नई निवारक कार्यवाही के दौरान। इस अंतर को समझने के लिए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश महत्वपूर्ण होगा।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर भी उठे सवाल

यह मामला केवल पीस बॉन्ड तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल भी उठता है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जाने वाली निवारक कार्रवाई और नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के बीच कानूनी संतुलन कैसे तय किया जाए। शांतिपूर्ण विरोध करना अपने आप में अपराध नहीं है, लेकिन प्रदर्शन पर लागू वैध प्रतिबंधों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होता है।

इसलिए अभिजीत दिपके के मामले में अंतिम कानूनी स्थिति समझने के लिए पुलिस की कार्रवाई, मजिस्ट्रेट के आदेश और संबंधित बॉन्ड की शर्तों का अध्ययन जरूरी है। केवल दोबारा बॉन्ड साइन कराए जाने से अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पहले बॉन्ड का उल्लंघन साबित हो गया था।

Location :  Delhi

Published :  18 October 2026, 6:27 PM IST

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