हम सब मर जाएंगे…” दिल्ली हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी से मचा हड़कंप, जानिए पूरा मामला

लुटियंस दिल्ली में पोलो ग्राउंड और दिल्ली जिमखाना क्लब जैसी ऐतिहासिक खुली जगहों को खाली कराने के केंद्र के फैसले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अगर हरियाली और खुले स्थान छीने गए तो दिल्ली का दम घुट जाएगा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 9 June 2026, 8:54 AM IST

New Delhi: राजधानी दिल्ली में लुटियंस जोन की ऐतिहासिक और हरियाली से भरी जमीनों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार के पोलो ग्राउंड और दिल्ली जिमखाना क्लब जैसी संपत्तियों को खाली कराने के फैसले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने न सिर्फ चिंता जताई बल्कि तीखी टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया कि अगर दिल्ली की बची-खुची हरियाली भी खत्म कर दी गई तो शहर का दम घुट जाएगा। यह मामला अब सिर्फ जमीन का नहीं बल्कि पर्यावरण और शहरी संतुलन का भी बन गया है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी से गरमाया मामला

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने सुनवाई के दौरान बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली पहले से ही हरियाली की भारी कमी से जूझ रही है और अगर नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) क्षेत्र की खुली जगहें भी खत्म कर दी गईं तो हालात और खराब हो जाएंगे। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो “दिल्ली का दम घुट जाएगा और हम सब मर जाएंगे।”

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सरकार की योजना पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी सवाल किया कि क्या इन खाली जमीनों पर हाई-राइज इमारतें बनाने की योजना है। कोर्ट की यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि लुटियंस दिल्ली की खुली जगहों के व्यावसायिक या प्रशासनिक उपयोग को लेकर गंभीर बहस चल रही है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से इस बात पर चिंता जताई कि अगर इन हरित क्षेत्रों का स्वरूप बदला गया तो इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ेगा।

इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई

यह पूरा मामला इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका से जुड़ा हुआ है, जिसमें बेदखली नोटिस को चुनौती दी गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका का निपटारा करते हुए निचली अदालत को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। साथ ही पटियाला हाउस कोर्ट को आदेश दिया गया है कि वह स्टे एप्लीकेशन पर बुधवार को ही सुनवाई करे और जल्द फैसला सुनाए।

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सार्वजनिक और रक्षा जरूरतें

केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने अदालत में दलील दी कि संबंधित जमीन की आवश्यकता सार्वजनिक और रक्षा उद्देश्यों के लिए है। उन्होंने कहा कि मध्य दिल्ली क्षेत्र में जगह सीमित है और सरकारी कार्यों के संचालन के लिए इसी इलाके का उपयोग जरूरी है। सरकार का तर्क है कि राष्ट्रीय हितों को देखते हुए यह कार्रवाई आवश्यक है।

लुटियंस दिल्ली की हरियाली पर बहस तेज

यह विवाद सिर्फ एक संपत्ति या क्लब तक सीमित नहीं है, बल्कि लुटियंस दिल्ली की उस पहचान से जुड़ा है जो अपनी खुली जगहों, पेड़ों और हरियाली के लिए जानी जाती है। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब यह बहस और तेज हो गई है कि क्या विकास और प्रशासनिक जरूरतों के नाम पर पर्यावरणीय संतुलन से समझौता किया जा सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  9 June 2026, 8:54 AM IST