
भारत की सोच कार्यक्रम का आयोजन(img: Dynamite news)
New Delhi: भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल सरकार की नीतियों और आधुनिक बुनियादी ढांचे से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना होगा। यह संदेश गुरुवार को दिल्ली के आईटीसी मौर्या होटल में आयोजित ‘भारत की सोच’ के प्रमुख चर्चा कार्यक्रम ‘मंत्रणा’ में देश के पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने दिया। कार्यक्रम में वह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। ‘ड्यूटीज ऑफ अ सिटिजन फॉर अ विकसित भारत’ यानी विकसित भारत के लिए नागरिकों के कर्तव्य विषय पर अपने लगभग 45 मिनट के संबोधन में उन्होंने अनुशासन, नैतिक शिक्षा, पारिवारिक संस्कार, लोकतांत्रिक जिम्मेदारी और राष्ट्रहित को लेकर अपने विचार रखे।
वेंकैया नायडू ने कहा कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा उनके मौलिक कर्तव्यों के पालन से भी जुड़ी है। लोकतंत्र में अधिकारों की चर्चा जरूरी है, लेकिन नागरिकों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति भी उतना ही गंभीर होना चाहिए। उन्होंने कानून के शासन, सामाजिक अनुशासन और समानता पर आधारित समाज के निर्माण को विकसित भारत की बुनियाद बताया।
उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए सरकार के साथ नागरिकों की भागीदारी भी अनिवार्य है। सरकार बेहतर शासन, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा और विकास के अवसर उपलब्ध कराए, वहीं नागरिक कानूनों का पालन करें, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें, करों का भुगतान करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जिम्मेदारी से भाग लें।
पूर्व उपराष्ट्रपति ने भारतीय परिवार व्यवस्था और पारंपरिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए और उनके व्यक्तित्व निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। केवल आधुनिक शिक्षा और कौशल ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि बच्चों में ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता और नैतिकता का विकास भी जरूरी है।
उन्होंने विद्यालयों में नैतिक शिक्षा को अधिक महत्व देने की बात कही। उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ ज्ञान देना या रोजगार के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए। भारतीय परंपराओं और धर्मग्रंथों में मौजूद नैतिक शिक्षाओं से भी नई पीढ़ी को परिचित कराने की जरूरत है।
अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए नायडू ने बताया कि ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने युवाओं से ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने, लगातार मेहनत करने और समाज की गतिविधियों पर नजर रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को आधुनिक तकनीक, डिजिटल साक्षरता, शोध और नवाचार जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताएं विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों का चुनाव करते समय उनके चरित्र, योग्यता और क्षमता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। संसद और विधानसभाओं में चर्चा, बहस और निर्णय की स्वस्थ परंपरा मजबूत होनी चाहिए।
नायडू ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और वंचित वर्गों के कल्याण को विकसित भारत के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचना चाहिए। जाति, धर्म और क्षेत्र के आधार पर तनाव बढ़ाने के बजाय लोगों को आपसी सम्मान और सहयोग की भावना अपनानी चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक और सनसनीखेज सामग्री को लेकर भी सावधानी बरतने का संदेश दिया। उनके मुताबिक, परिवार से लेकर समाज और देश तक शांति बनाए रखना विकास के लिए आवश्यक है।
कार्यक्रम की शुरुआत में ‘भारत की सोच’ के अध्यक्ष अनिल राजपूत ने नागरिक जिम्मेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सुबह छह बजे लाल बत्ती पर खाली सड़क का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब कोई पुलिसकर्मी मौजूद न हो, तब भी क्या हम नियमों का पालन करते हैं? उन्होंने कहा कि यही छोटा-सा निर्णय बताता है कि हम नियमों को बोझ मानते हैं या अपनी जिम्मेदारी।
राजपूत ने कहा कि विकसित भारत की पहचान केवल एक्सप्रेसवे, आधुनिक रेलवे, तकनीक और ऊंची इमारतों से नहीं होगी। इसके लिए नागरिकों को सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, ईमानदारी और दूसरों के प्रति सम्मान को अपनी आदत बनाना होगा। उन्होंने बताया कि ‘भारत की सोच’ नागरिक कर्तव्यों को दैनिक जीवन में उतारने के उद्देश्य से एक नागरिक चार्टर को अंतिम रूप दे रहा है।
प्रतियोगिताओं के विजेता सम्मानित हुए(img: Dynamite news)
कार्यक्रम के दौरान ‘भारत की सोच’ की ओर से स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए आयोजित निबंध और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। संस्था ने विद्यार्थियों के बीच जागरूकता और विचार-विमर्श को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘जनचेतना 2026’ के तहत प्रतियोगिताओं का आयोजन किया था। पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने विजेताओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा गया कि आज के विद्यार्थी ही कल के नेतृत्वकर्ता हैं और देश का भविष्य इन्हीं युवा नागरिकों के हाथों में है।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि 2047 के विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब सरकार, संस्थान, परिवार और नागरिक अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे। देश का भविष्य केवल नीतियों से नहीं, बल्कि उन मूल्यों और व्यवहारों से भी तय होगा, जिन्हें भारतीय समाज रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाता है।
Location : New Delhi
Published : 29 October 2026, 4:59 PM IST