डाइनामाइट न्यूज़ के पॉडकास्ट The Candid Talk में कॉरपोरेट लॉ एक्सपर्ट, लेखक और Sangeet Kedia Academy के संस्थापक-निदेशक संगीत केडिया ने करियर, स्किल्स, AI, इंटर्नशिप, असफलता और युवाओं की सोच पर खुलकर बात की। एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश के साथ बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे सही दिशा, धैर्य और गहराई से सीखने की आदत एक साधारण छात्र को कॉरपोरेट लीडर बना सकती है।

मनोज टिबड़ेवाल आकाश के साथ खास बातचीत में संगीत केडिया
New Delhi: डाइनामाइट न्यूज़ के पॉडकास्ट The Candid Talk में इस बार बातचीत सिर्फ करियर की नहीं थी, बल्कि उस सोच की थी जो किसी छात्र की पूरी जिंदगी बदल सकती है। एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश के साथ खास बातचीत में ICSI के फेलो मेंबर, कॉरपोरेट लॉ एक्सपर्ट, लेखक, पूर्व कंपनी सेक्रेटरी और Sangeet Kedia Academy के संस्थापक-निदेशक संगीत केडिया ने अपने सफर, संघर्ष, फैसलों और आज के युवाओं के सामने खड़ी चुनौतियों पर खुलकर बात की।
संगीत केडिया ने मनोज टिबड़ेवाल आकाश के साथ खास बातचीत में बताया कि उन्होंने हंसराज कॉलेज से बीएससी मैथ्स ऑनर्स किया था। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें साफ दिशा नहीं मिल रही थी कि आगे क्या करना चाहिए। कई लोग यूपीएससी (UPSC) की सलाह दे रहे थे, लेकिन उसमें उनकी खास दिलचस्पी नहीं थी। इसी दौरान कुछ सीनियर्स से बातचीत हुई और उन्होंने कंपनी सेक्रेटरी कोर्स करने की सलाह दी। संगीत केडिया को यह उभरता हुआ प्रोफेशन लगा और फिर उन्होंने इसी दिशा में कदम बढ़ाया। इसके साथ ही उन्होंने एलएलबी भी की। यहीं से उनके कॉरपोरेट लॉ करियर की नींव पड़ी। आगे चलकर उन्होंने CS Executive, Professional और CA Inter के लिए महत्वपूर्ण किताबें लिखी और ICLS, Indian Law Institute और NIRC of ICSI जैसे संस्थानों में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई।
संगीत केडिया ने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कंपनी में कंपनी सेक्रेटरी के पद पर काम शुरू किया। करीब डेढ़ साल नौकरी करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि यह रास्ता उनके लिए नहीं है। उसी समय कुछ लोगों ने उनसे कहा कि वह किसी भी विषय को बहुत अच्छे से समझाते हैं, इसलिए उन्हें एजुकेशन लाइन में जरूर कोशिश करनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने पढ़ाने की दुनिया में कदम रखा और अलग-अलग कोचिंग संस्थानों में पढ़ाना शुरू किया। बाद में 2007 में उन्होंने Sangeet Kedia Academy की शुरुआत की। उन्होंने साफ कहा कि एजुकेशन ही उनके दिल के सबसे करीब है और यही उनकी असली पहचान भी है। उन्होंने यह भी माना कि नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करना आसान फैसला नहीं था, क्योंकि उस समय वह दिल्ली में किराए के मकान में रहते थे और उनकी नई-नई शादी भी हुई थी। बावजूद इसके उन्होंने अपने दिल की सुनी और वही फैसला उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बन गया।
AI के दौर पर बात करते हुए संगीत केडिया ने बेहद संतुलित राय रखी। उन्होंने कहा कि AI आज की सच्चाई है और हर व्यक्ति को इसका इस्तेमाल करना ही पड़ेगा। इसे नकारा नहीं जा सकता। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI का जरूरत से ज्यादा और गलत इस्तेमाल बेहद खतरनाक हो सकता है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ वकीलों ने AI से पिटीशन ड्राफ्ट करवाई और उसे कोर्ट में पेश कर दिया, जो गलत तरीका है। उनका कहना था कि AI को सहायक टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहिए न कि पूरी तरह उसी पर निर्भर हो जाना चाहिए। यह बात उन्होंने खास तौर पर छात्रों और कोचिंग संस्थानों दोनों के लिए कही। उनके मुताबिक, टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल फायदेमंद है, लेकिन सोचने-समझने की क्षमता खत्म कर देना सबसे बड़ी गलती होगी।
बातचीत के दौरान संगीत केडिया ने सफल और औसत छात्र के बीच का अंतर भी बहुत आसान भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि औसत छात्र सिर्फ पास होने के लिए पढ़ाई करता है, जबकि सफल छात्र हर चीज को गहराई से समझने की कोशिश करता है। जो छात्र सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए पढ़ते हैं, वे बाद में ज्ञान का कम इस्तेमाल कर पाते हैं। वहीं जो छात्र समझकर पढ़ते हैं, उन्हें आगे चलकर उसका बड़ा फायदा मिलता है।
इंटर्नशिप को लेकर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि करियर का असली लॉन्चपैड है, लेकिन कई लोगों ने इसे सिर्फ एक रस्म बनाकर छोड़ दिया है और इसकी कीमत उन्हें बाद में चुकानी पड़ती है। छोटे शहरों के छात्रों को लेकर उन्होंने कहा कि CS उनके लिए बड़ा गेम-चेंजर बन सकता है, लेकिन जीवन में बड़ी सफलता के लिए बड़े शहरों का अनुभव भी जरूरी है। आज के युवाओं की सबसे खतरनाक आदत पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा प्रभाव और धैर्य की कमी युवाओं को उनकी दिशा से भटका रही है। उनका साफ संदेश था कि दोस्तों और रिश्तेदारों की बातों में आकर करियर तय मत करो, बल्कि यह समझो कि जिस क्षेत्र में जाना चाहते हो, उसकी समाज में कितनी जरूरत है, उसमें कितने अवसर हैं और आपका भविष्य उसमें कैसे बन सकता है।