The Candid Talk: छठी क्लास पास, 120 रुपये तनख्वाह… फिर कैसे बने डायमंड की दुनिया के बादशाह, पढ़ें गोविंद भाई धोलकिया की कहानी!

डाइनामाइट न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने आज का The Candid Talk पॉडकास्ट शुरू करने से पहले कहा, “सपना वह नहीं होते जो हम सोते वक्त देखते हैं, बल्कि सपने वे होते हैं जो इंसान को सोने नहीं देते। आज हम बात करेंगे गोविंद भाई धोलकिया से, जिन्होंने बिजनेस को केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने कर्मचारियों को परिवार मानकर एक नई मिसाल कायम की है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 5 April 2026, 9:59 AM IST

New Delhi: आज हमारे साथ देश के सबसे चर्चित पॉडकास्ट The Candid Talk में मौजूद हैं डायमंड किंग नाम से मशहूर गोविंद भाई धोलकिया गोविंद भाई धोलकिया से डाइनामाइट न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने पहला सवाल पूछा कि वह एक छोटे से गांव से आए और डायमंड किंग बन गए। इस दौरान उनके सामने कौन-कौन सी चुनौतियां आई थीं।

गोविंद भाई धोलकिया ने इसका बहुत ही खूबसूरत जवाब दिया। उन्होंने कहा, "हम चलते रहे और कारोबार बढ़ता गया। हम तो छोटे से गांव के निवासी थे, जहां की आबादी सिर्फ 700 थी। गांव में पहली से सातवीं क्लास तक का स्कूल था। मैंने केवल छठी क्लास तक पढ़ाई की। सातवीं क्लास का एग्जाम देने से पहले अपने भाई के साथ दुधाला गांव को छोड़कर सूरत आ गया।

गोविंद भाई धोलकिया ने बताया कि, "जब मैं सूरत आया, वहां डायमंड कटिंग और पॉलिश में 200 लोग काम करते थे, जिसमें मैं भी शामिल था। आज वहां करीब 10 लाख लोग काम करते हैं। मैंने फैक्ट्री में 14 साल काम किया, वह भी 14 घंटे प्रतिदिन। सुबह 6 बजे फैक्ट्री शुरू होती थी और रात 8 बजे बंद। 14 घंटे काम करने के बाद भी इतनी खुशी मिलती थी क्योंकि गांव में एक दिन के काम का 1 रुपये मिलता था और डायमंड कटिंग करने पर चार रुपये। अगर किसी को चार गुना ज्यादा पैसा मिलता तो वह खुश होते थे।"

मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने अगला सवाल पूछा: "जब आपने रामकृष्ण एक्सपोर्ट कंपनी की शुरुआत की थी, तो आपके पास पैसा था या भरोसा?"

गोविंद भाई धोलकिया बताते हैं, "मैंने आज तक किसी से 'तू' कहकर बात नहीं की। इसका कारण यह है कि जब मैं 18 साल का था, तब मैंने एक महाराज की कथा सुनी थी। उन्होंने कहा था, 'जैसा आप दूसरों को दोगे, वैसा आपको वापस मिलेगा। अगर आप किसी को सम्मान देंगे, तो आपको सम्मान मिलेगा।' तभी से मैंने सोचा कि मैं सभी से तहजीब और 'आप' कहकर बात करूंगा। यही वजह है कि जिस कंपनी में मैं काम करता था, वहां के युवा लोग मुझे 'गोविंद भाई' कहकर बुलाने लगे।"

कपंनी का नाम कैसे रखा?

उन्होंने आगे बताया, "डोंगरी जी महाराज कहते थे कि कोई भी काम करने से पहले भगवान को साथ रखना चाहिए। इसलिए मैंने 'रामकृष्ण एक्सपोर्ट' के नाम से अपनी कंपनी खोली। इसके अलावा, लक्ष्मी चाहिए थी, इसलिए नाम के आगे 'श्री' जोड़ दिया।"

5 लोगों से शुरू किया था काम

गोविंद भाई धोलकिया ने कहा, "हम तीन दोस्त नौकरी के लिए सूरत आए थे। हमारे पास कुल 15,000 रुपये थे और उस वक्त हमारे पास केवल दो वर्कर थे। आज हमारी कंपनी में 9,000 वर्कर हैं। वर्तमान में हमारा एक्सपोर्ट 12,000 करोड़ रुपये का है और 100 से ज्यादा देशों में हमारा डायमंड एक्सपोर्ट होता है।"

सत्य और विश्वास से दुनिया को जीता

उन्होंने 2008 की आर्थिक मंदी का भी जिक्र किया। गोविंद भाई धोलकिया बताते हैं, "2007 में हमारी कंपनी इंडिया में 25वें नंबर पर थी, वहीं 2009 में टॉप फाइव में आ गई। यह सब हमारे कर्मचारियों की वजह से हुआ। जब डायमंड मार्केट 30% कम हुई, तब भी हमने अपने कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला। उनके भरोसे और मेहनत के कारण हम टॉप फाइव में पहुंचे। इसलिए मैं कहता हूं कि सत्य और विश्वास से दुनिया को जीता जा सकता है।" गोविंद भाई का मानना है, "अगर कोई काम करना है तो पूरी ईमानदारी से करो। थोड़ी भी चीटिंग की तो बुरा वक्त शुरू हो जाएगा।"

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डायमंड और गोल्ड में फर्क?

उन्होंने डायमंड और सोने की तुलना पर कहा, "आज के समय में सब जानते हैं कि डायमंड बहुत महंगा है, लेकिन लोग सोना खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। डायमंड हर जगह नहीं बेचा जा सकता, जबकि गोल्ड आसानी से बिक जाता है। दूसरी वजह, गोल्ड सामान्य है लेकिन डायमंड हाई क्लास माना जाता है।"

16 साल की उम्र में पढ़ ली थी पूरी भगवद गीता

गोविंद भाई ने यह भी बताया कि उन्होंने 16 साल की उम्र में पूरी भगवद गीता पढ़ ली थी। यह सुनने में आसान लगता है, लेकिन असल में यह बहुत कठिन है। उन्होंने कहा कि यह पुराने जन्म का अनुभव है और आज भी उन्हें पूरी भगवद गीता मौखिक याद है।

नौकरी और व्यापार में कितना फर्क?

उन्होंने यह सलाह दी कि नौकरी और अपने व्यापार में आगे बढ़ने के लिए मेहनत, ईमानदारी और समर्पण जरूरी है। "अगर आपको आगे बढ़ना है, तो नौकरी छोड़कर खुद का व्यापार करना होगा। उसके लिए जी-तोड़ मेहनत करनी होगी और सप्ताहांत का ध्यान नहीं रखना पड़ेगा।"

जब अमित शाह ने पीएम मोदी के कहने पर गोविंद भाई को किया था कॉल

मनोज टिबड़ेवाल आकाश के साथ पॉडकास्ट में गोविंद भाई ने एक मजेदार बात साझा करते हुए कहा, "मैं कभी राजनीति में नहीं जाना चाहता था। अमित शाह का कॉल आया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपको राज्यसभा भेजने का फैसला लिया है। मैंने घर में चर्चा की और तय किया कि पीएम मोदी के कहने पर ही राज्यसभा जाऊंगा। आज मैं राज्यसभा सांसद भी हूं, लेकिन मैंने उस वक्त अमित शाह से मना कर दिया था।"

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गरीबों से इंसान बनना है महान

गोविंद भाई का मानना है कि गरीबी इंसान को ऊपर पहुंचाती है। "अगर कोई इंसान गरीब नहीं होगा, तो वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता। गरीबी में इंसान को संघर्ष करना पड़ता है, खून-पसीना बहाना पड़ता है, उसके बाद वह आगे बढ़ता है।" उन्होंने आगे कहा, "अगर कोई पहचान बनानी है और आसमान तक नाम पहुंचाना है, तो ईमानदारी से काम करो। जो मेरे पास है, उसी में आनंद लेना सीखो।"

पीएम मोदी समेत आठ लोगों को पत्र लिखा

जब उनकी किडनी खराब हुई, तब उन्होंने पीएम मोदी समेत आठ लोगों को पत्र लिखा, "मुझे नहीं पता कि मैं आगे जिंदगी जी पाऊंगा या नहीं। लेकिन 72 साल की उम्र में मैंने 300 साल की जिंदगी जी ली। अगर मैं चला जाऊं तो मुझे किसी बात का गम नहीं। भगवान ने मुझे जो भी दिया, उसमें मैं संतुष्ट हूं।"

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  • 5 April 2026, 9:59 AM IST