तमिलनाडु चुनाव 2026 के लिए बीजेपी की उम्मीदवार सूची में कई चौंकाने वाले फैसले सामने आए हैं। कुछ बड़े नामों को मौका मिला, तो कुछ चर्चित चेहरे बाहर रह गए। आखिर पार्टी ने किन रणनीतियों के तहत ये फैसले लिए और इसका चुनावी असर क्या होगा? यहां देखें पूरी लिस्ट।

प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Google)
Chennai: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एनडीए गठबंधन के तहत अपनी 27 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी ने सहयोगी AIADMK के साथ सीट साझा समझौते के बाद यह सूची घोषित की है।
इस सूची में कई प्रमुख नेताओं को मैदान में उतारा गया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी सीमित सीटों पर भी मजबूत रणनीति के साथ चुनाव लड़ने जा रही है।
बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री L. Murugan को अविनाशी (SC) सीट से उम्मीदवार बनाया है। वह पार्टी के प्रमुख दलित चेहरों में से एक माने जाते हैं और पहले तमिलनाडु बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनकी उम्मीदवारी से पार्टी ने पश्चिमी तमिलनाडु और दलित वोट बैंक को साधने का संकेत दिया है।
इस बार की सूची में सबसे बड़ा सरप्राइज K. Annamalai का नाम नहीं होना है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई चुनाव नहीं लड़ेंगे। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने उन्हें चुनावी रणनीति, संगठन और प्रचार अभियान की जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया है। ऐसे में वे पर्दे के पीछे रहकर पूरे राज्य में बीजेपी की चुनावी तैयारियों को मजबूत करेंगे।
बीजेपी ने वरिष्ठ नेता और तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल Tamilisai Soundararajan को मायलापुर सीट से उम्मीदवार बनाया है। पार्टी का मानना है कि शहरी क्षेत्रों और महिला मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ है, जो चुनाव में फायदा दिला सकती है। मायलापुर सीट को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एनडीए गठबंधन के तहत बीजेपी को कुल 27 सीटें मिली हैं। इनमें कोयंबटूर नॉर्थ, नागरकोइल, विलावनकोड और रामनाथपुरम जैसी अहम सीटें शामिल हैं। पार्टी इन सीटों पर मजबूत और पहचान वाले चेहरों को उतारकर अधिकतम प्रभाव बनाने की कोशिश कर रही है।
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तमिलनाडु में मतदान 23 अप्रैल 2026 को होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में चुनावी माहौल और गर्म होने की उम्मीद है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी इस बार कम सीटों पर चुनाव लड़कर भी प्रभाव बढ़ाने की रणनीति अपना रही है। अन्नामलाई जैसे बड़े नेता को चुनाव से दूर रखकर संगठन पर ध्यान देना और मुरुगन व तमिलिसाई जैसे चेहरों को आगे करना, पार्टी की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा माना जा रहा है।