सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी FIR रद्द, CJI के फैसले के बाद CJP ने बदला पूरा प्लान

छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस लेने की केंद्र और चार राज्यों की पहल के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च वापस ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट में संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने इसकी जानकारी दी। केंद्र, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने एफआईआर रद्द करने के लिए आवेदन दाखिल किए हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 1 September 2026, 4:41 PM IST

New Delhi: छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। जिस विरोध मार्च को लेकर राजधानी दिल्ली में फिर से टकराव की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही थी, उसे अब टाल दिया गया है। केंद्र और चार राज्यों की ओर से एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपना विरोध मार्च वापस लेने का फैसला किया है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान CJP के संगठन के सह-संयोजक और प्रवक्ता सौरव दास ने पीठ को इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन और अदालत के आदेश को देखते हुए संगठन ने मार्च वापस लेने का निर्णय लिया है। अब संगठन सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन और अदालत के आदेश के अनुपालन का इंतजार करेगा।

केंद्र समेत पांच सरकारों ने उठाया बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि केंद्र सरकार यानी दिल्ली पुलिस के अलावा बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किए हैं।

सरकारों की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया है कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से संबंधित घटनाओं को लेकर भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। सरकार के इस रुख को आंदोलन से जुड़े विवाद को शांत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। मेहता ने अदालत को बताया कि इन आवेदनों के जरिए 25 जुलाई को CJP नेताओं के साथ हुई बातचीत के दौरान केंद्र की ओर से दिए गए आश्वासन को पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

5 सितंबर को होना था विरोध मार्च

CJP ने इससे पहले 24 अगस्त को 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया था। संगठन का आरोप था कि 25 जुलाई को हुई बातचीत के दौरान छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इस दिशा में कार्रवाई में देरी हो रही थी। इसी को लेकर संगठन ने दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया था। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाना था।

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CJP की ओर से दावा किया गया था कि मार्च में NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या के मामलों में मृत छात्रों के परिजन और जुलाई में हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोग नेतृत्व की भूमिका में रहेंगे। ऐसे में 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च सरकार और आंदोलनकारी संगठन के बीच तनाव का एक और बड़ा केंद्र बन सकता था। हालांकि अब एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होने और सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से आश्वासन दिए जाने के बाद संगठन ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है।

सुप्रीम कोर्ट में सौरव दास ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ के सामने कहा कि सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन और अदालत की ओर से दी गई न्यायिक मान्यता को देखते हुए CJP 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस ले रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन अब अदालत के आदेश के अनुपालन की प्रतीक्षा करेगा। दास ने इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से पेश वकीलों और अदालत के प्रयासों के लिए भी धन्यवाद दिया। यानी फिलहाल CJP ने सरकार के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए सड़क पर उतरने का फैसला टाल दिया है।

CJI सूर्यकांत ने बातचीत को बताया समाधान का रास्ता

CJP की ओर से मार्च वापस लेने के फैसले का सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वागत किया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष सद्भावना के साथ काम करें तो सभी मुद्दों को एक-एक करके सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसे खुले मन से चर्चा के जरिए हल न किया जा सके।

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत के सामने कहा कि दोनों पक्षों ने रचनात्मक तरीके से काम किया और एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी की तरह नहीं देखा। इससे साफ है कि अदालत की मध्यस्थ भूमिका और दोनों पक्षों के बीच बातचीत ने इस विवाद को फिलहाल टकराव की स्थिति में जाने से रोकने में अहम भूमिका निभाई है।

25 जुलाई की बातचीत बनी फैसले की अहम कड़ी

पूरे मामले में 25 जुलाई को CJP नेताओं और केंद्र के बीच हुई बातचीत महत्वपूर्ण कड़ी रही। संगठन का कहना था कि उस बातचीत में छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया गया था। बाद में कार्रवाई में देरी को लेकर CJP ने नाराजगी जताई और 24 अगस्त को 5 सितंबर के विरोध मार्च का ऐलान कर दिया। संगठन ने सरकार पर अपने आश्वासन को लागू करने में देरी का आरोप लगाया था। अब केंद्र के साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की ओर से एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किए जाने के बाद स्थिति बदल गई है।

Location :  New Delhi

Published :  1 September 2026, 4:13 PM IST