फिलहाल कुछ नहीं बदलेगा! एथेनॉल सप्लाई पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, BPCL की याचिका के बाद रोक दिया बदलाव

एथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। BPCL की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं करने को कहा है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 1 July 2026, 8:17 PM IST

New Delhi: एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। यानी जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं होती, मौजूदा आवंटन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यह आदेश भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और फिलहाल मौजूदा व्यवस्था जारी रखने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

यह मामला कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को एक डिस्टिलरी की ओर से अधिक एथेनॉल आवंटन की मांग पर विचार करने और निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। अगर इस पर अमल होता है तो देशभर में लागू एथेनॉल आवंटन प्रणाली प्रभावित हो सकती है। उनका तर्क था कि इससे केंद्र सरकार की 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) नीति के क्रियान्वयन पर भी असर पड़ सकता है।

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उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि एथेनॉल सप्लाई से जुड़े अनुबंध पहले ही अंतिम रूप ले चुके हैं और इसी तरह के कई मामले देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में भी लंबित हैं। ऐसे में सभी मामलों को एक साथ सुनने की आवश्यकता हो सकती है।

किस कंपनी ने उठाया था विवाद?

पूरा विवाद मेसर्स विनप डिस्टिलरीज एंड शुगर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका से शुरू हुआ। कंपनी का कहना है कि उसकी सालाना एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 9.90 करोड़ लीटर है। उसने ESY 2025-26 के लिए 9.26 करोड़ लीटर की आपूर्ति की बोली लगाई थी, लेकिन उसे केवल 3.92 करोड़ लीटर का आवंटन मिला। कंपनी का दावा था कि इतनी कम मात्रा का आवंटन उसके प्लांट की क्षमता और निवेश के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर उसने कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाईकोर्ट ने क्यों दी थी राहत?

कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ऐसे समर्पित एथेनॉल प्लांट, जिन्हें केवल तेल कंपनियों को एथेनॉल सप्लाई करने के लिए स्थापित किया गया है और जो किसी अन्य उत्पाद या ग्राहक को आपूर्ति नहीं कर सकते, उन्हें अनुचित नुकसान की स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता।

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अदालत ने यह भी माना था कि कंपनी को मौजूदा नीति और तेल कंपनियों के साथ हुए समझौतों के आधार पर उचित उम्मीद (Legitimate Expectation) रखने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने OMCs को कंपनी के आवेदन पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था।

क्यों अहम है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?

सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश फिलहाल किसी भी तरह के नए आवंटन या बदलाव पर रोक लगाता है। इसका मतलब यह है कि जब तक अदालत अंतिम फैसला नहीं देती, एथेनॉल सप्लाई की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। यह मामला सिर्फ एक कंपनी के आवंटन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि देश की एथेनॉल नीति, तेल कंपनियों की खरीद प्रक्रिया और ईंधन में एथेनॉल मिश्रण के राष्ट्रीय लक्ष्य से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए उद्योग जगत और एथेनॉल उत्पादकों की नजर इस मामले पर बनी हुई है।

Location :  New Delhi

Published :  1 July 2026, 8:17 PM IST