
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को लगाई फटकार (इमेज सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने गाज़ियाबाद में 4 साल की मासूम बच्ची से कथित तौर पर रेप और हत्या मामले में UP सरकार को फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने मामले की जांच के लिए SIT गठित करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मामले की कार्यवाही एसआईटी की रिपोर्ट आने तक रोकने के लिए भी कहा है।
कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) से मामले की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने को कहा।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने निर्देश दिया कि SIT में उत्तर प्रदेश कैडर की पुलिस कमिश्नर/इंस्पेक्टर जनरल रैंक की एक महिला पुलिस अधिकारी होनी चाहिए, लेकिन उसके राज्य में कोई रिश्तेदार नहीं होने चाहिए। एक महिला अधिकारी पुलिस सुपरिटेंडेंट/एडिशनल SP रैंक की होनी चाहिए। और एक महिला डिप्टी SP या पुलिस इंस्पेक्टर होनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि SIT के गठन की अधिसूचना हर हाल में रविवार रात 11 बजे तक जारी कर की जानी चाहिए। और जाँच बिना किसी देरी के शुरू कर दी जानी चाहिए। कोर्ट ने SIT से कहा कि वह जाँच जितनी जल्दी हो सके, तो दो हफ़्तों के अंदर पूरी कर ले।
गौरतबल है कि 16 मार्च को बच्ची को चॉकलेट दिलाने के बहाने एक पड़ोसी बहला-फुसलाकर ले गया था। जब बच्ची वापस नहीं लौटी, तो उसके पिता ने उसे ढूंढ़ना शुरू किया। काफी खोजबीन के बाद बच्ची उन्हें एक खेत में बेहोश और खून से लथपथ मिली।
बच्ची के पिता (जो दिहाड़ी मज़दूर हैं) की तरफ़ से पेश हुए सीनियर वकील एन हरिहरन ने आरोप लगाया कि गाज़ियाबाद के दो प्राइवेट अस्पतालों ने बच्ची को भर्ती करने से मना कर दिया था, और आखिरकार एक सरकारी अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
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कोर्ट ने SIT से कहा कि पीड़ित बच्ची के माता-पिता द्वारा उठाई गई सभी शिकायतों पर गौर करे, खासकर अहम गवाहों की सुरक्षा के मामले में और उन प्राइवेट अस्पतालों की भूमिका की जाँच करे जिन पर बच्ची को भर्ती न करके लापरवाही बरतने का आरोप है।
कोर्ट ने आगे कहा कि SIT की जांच के नतीजों के आधार पर आगे की ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से (जिसके सामने इस मामले की सुनवाई चल रही है) कहा कि वह SIT द्वारा सप्लीमेंट्री रिपोर्ट जमा किए जाने तक सुनवाई को रोककर रखे। बेंच ने कहा कि निजी अस्पतालों के स्पष्टीकरण/बचाव सहित सभी आरोपों की SIT द्वारा स्वतंत्र रूप से जांच की जाएगी।
एन. हरिहरन ने दावा किया कि अस्पतालों को बचाने की कोशिश की जा रही थी और पुलिस ने लड़की के पिता को CrPC की धारा 164 के तहत उनका बयान दर्ज कराने के लिए मजिस्ट्रेट के सामने घसीटा था।
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उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश होते हुए, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और ट्रायल कोर्ट ने इसका संज्ञान भी ले लिया है। जस्टिस बागची ने कहा कि अगर बच्चे के पिता को निजी अस्पतालों को लेकर कोई आशंका है, तो वे अपने वकील के साथ ट्रायल कोर्ट के सामने पेश हो सकते हैं।
Location : New Delhi
Published : 25 April 2026, 3:12 PM IST