
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा
नई दिल्ली: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा से जुड़े दिवालियापन मामले में अपने पहले के आदेश पर रोक लगा दी है। मंगलवार को हुई सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि गारंटर के तौर पर सुभाष चंद्रा अपनी संपत्तियों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर या बेच नहीं सकते।
यह फैसला NCLT के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें चंद्रा को करीब 6.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिवालियापन प्रक्रिया निपटाने का रास्ता मिला था। जबकि उनके खिलाफ दावों की कुल राशि 22,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी।
मामले की सुनवाई कर रही NCLT की तीन सदस्यीय बेंच के सदस्यों के बीच आदेश को लेकर मतभेद सामने आए। इसके बाद मामले को अब पांच सदस्यीय विशेष बेंच के पास भेज दिया गया है।
मंगलवार को सुनवाई शुरू करने वाली विशेष बेंच ने कहा कि पहले के आदेशों में अलग-अलग राय सामने आई थी और कोई स्पष्ट बहुमत वाली राय उपलब्ध नहीं थी, जिसे अंतिम आदेश के रूप में लागू किया जा सके।
NCLT की विशेष बेंच ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। अब पांच सदस्यीय बेंच इस पूरे मामले पर नए सिरे से विचार करेगी और तय करेगी कि दिवालियापन प्रक्रिया को आगे किस दिशा में ले जाना है।
इससे पहले NCLT के आदेश में सुभाष चंद्रा को करीब 6.25 करोड़ रुपये के भुगतान के जरिए दिवालियापन कार्यवाही खत्म करने का विकल्प दिया गया था।
हालांकि, इस फैसले पर सवाल उठे थे कि जब स्वीकृत दावों की राशि हजारों करोड़ रुपये में है, तो इतनी कम राशि में मामले का निपटारा कैसे किया जा सकता है।
अब पांच सदस्यीय बेंच इन सभी मुद्दों पर विचार करेगी।
Location : New Delhi
Published : 1 September 2026, 11:05 AM IST
Topics : Bankruptcy Case India Essel Group Chairman Subhash Chandra NCLT Order Stay NCLT Special Bench Subhash Chandra Insolvency Case