रायपुर के 14 वर्षीय छात्र सात्विक चंद्राकर ने पैरालिसिस मरीजों के लिए एक विशेष ‘लाइफ सूट’ तैयार किया है, जिससे हाथों की गतिविधि में सुधार संभव है। उनके इस AI आधारित इनोवेशन का चयन अंतरराष्ट्रीय AI समिट 2026 के लिए हुआ है।

सात्विक चंद्राकर (Img: Google)
Raipur: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के 14 साल के स्टूडेंट सात्विक चंद्राकर ने अपनी अनोखी टेक्नोलॉजिकल सोच से राज्य का नाम रोशन किया है। 9वीं क्लास के स्टूडेंट सात्विक को इंटरनेशनल AI समिट 2026 के लिए चुना गया है, जहां वह अपना इनोवेटिव "लाइफ सूट" प्रोजेक्ट पेश करेंगे।
यह समिट नई दिल्ली के मशहूर भारत मंडपम वेन्यू पर होगा, जिसमें भारत और विदेश की टीमें हिस्सा लेंगी।
सात्विक छत्तीसगढ़ के पहले स्टूडेंट हैं जिन्हें इस इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर अपना AI-बेस्ड इनोवेशन पेश करने का मौका मिला है। उनकी इस कामयाबी से उनके परिवार, स्कूल और पूरे शहर को गर्व है।
सात्विक ने पैरालिसिस से जूझ रहे मरीजों की मदद के लिए एक खास "लाइफ सूट" डिजाइन किया है। यह सूट दोनों हाथों में पहना जाता है। इसमें दो मोटर हैं जो हाथों की मूवमेंट को एक्टिवेट करने में मदद करती हैं। यह टेक्नोलॉजी न्यूरोप्लास्टिसिटी के प्रिंसिपल पर आधारित है, जो दिमाग में बचे हुए एक्टिव न्यूरॉन्स को हाथ की मूवमेंट को बेहतर बनाने के लिए ट्रेन करती है।
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सात्विक ने बताया कि उन्हें इस प्रोजेक्ट का आइडिया अपनी मां से मिला। जब उन्हें पता चला कि बहुत से लोगों के हाथ काम नहीं करते, तो उन्होंने इस विषय पर बहुत रिसर्च की। उन्हें पता चला कि बाज़ार में मिलने वाली रोबोटिक मशीनें बहुत महंगी हैं और अक्सर विदेश से इम्पोर्ट की जाती हैं, जिससे वे आम मरीज़ों की पहुँच से बाहर हो जाती हैं।
रिसर्च के बाद, सात्विक ने अपने प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। कड़ी मेहनत और लगन से, उन्होंने सिर्फ 10 दिनों में इस लाइफ सूट का शुरुआती मॉडल बनाया। उनके टीचरों ने उन्हें प्रोजेक्ट बनाने और पेश करने में पूरी गाइडेंस दी।
सात्विक अपनी सफलता का क्रेडिट अपने माता-पिता और स्कूल के टीचरों को देते हैं। उनका कहना है कि सही गाइडेंस और हौसला बढ़ाने से स्टूडेंट बड़ी चीज़ें हासिल कर सकते हैं।
सात्विक इंटरनेशनल AI समिट 2026 के लिए अपने सिलेक्शन को अपनी जिंदगी का एक टर्निंग पॉइंट मानते हैं। उनका सपना इंजीनियर बनना और ऐसी टेक्नोलॉजी बनाना है जिससे जरूरतमंदों को फायदा हो सके। उनका मानना है कि भारतीय युवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के क्षेत्र में बहुत ज्यादा पोटेंशियल है।