
ममता बनर्जी
West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक अजेय रहीं Mamata Banerjee आज अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं। कभी ‘दीदी’ के नाम से जनता के दिलों पर राज करने वाली यह नेता अब उस स्थिति में हैं जहां उनकी पार्टी सत्ता से बाहर होती नजर आ रही है। चुनावी नतीजों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार बंगाल की सियासत में बड़ा बदलाव हुआ है और All India Trinamool Congress का किला दरक गया है।
15 साल का शासन, पहली बार बड़ा झटका
पिछले करीब डेढ़ दशक से West Bengal की सत्ता पर काबिज रही टीएमसी को इस बार बड़ा नुकसान हुआ है। लगातार चौथी बार जीत की उम्मीद लगाए बैठीं Mamata Banerjee इस बार बाजी नहीं मार पाईं। दूसरी ओर Bharatiya Janata Party ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए राज्य में सरकार बनाने की राह साफ कर ली है। यह पहली बार होगा जब भाजपा बंगाल में सत्ता संभालेगी।
साधारण शुरुआत से शिखर तक का सफर
Mamata Banerjee का राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। 1970 के दशक में उन्होंने Indian National Congress के साथ अपनी राजनीति की शुरुआत की।
1991 में वे लोकसभा पहुंचीं और P. V. Narasimha Rao सरकार में मंत्री बनीं। इसके बाद 1998 में उन्होंने टीएमसी की स्थापना कर अपनी अलग पहचान बनाई।
रेल मंत्री से मुख्यमंत्री तक
Mamata Banerjee ने Atal Bihari Vajpayee सरकार में रेल मंत्री के रूप में भी काम किया। बाद में United Progressive Alliance सरकार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2011 में उन्होंने वामपंथी दलों के 34 साल पुराने शासन को खत्म कर इतिहास रच दिया और बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
नंदीग्राम से बनी मजबूत जमीन
Nandigram आंदोलन ने ममता बनर्जी को जननेता के रूप में स्थापित किया। उन्होंने टाटा की परियोजना के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर ग्रामीण और आम जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई, जो आगे चलकर उनकी राजनीतिक ताकत बनी।
अपने कार्यकाल में Mamata Banerjee ने कई जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं। ‘कन्याश्री’ जैसी योजनाओं ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया, वहीं ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना ने स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में मदद की। उन्होंने ग्रामीण विकास, शिक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण पर खास ध्यान दिया। हालांकि, उनके शासनकाल में कई विवाद भी सामने आए। राजनीतिक हिंसा और कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने लगातार सवाल उठाए। विकास कार्यों और नीतियों के क्रियान्वयन को लेकर भी आलोचना होती रही।
अब आगे क्या होगा?
यह हार Mamata Banerjee के लिए बड़ा झटका जरूर है, लेकिन उनके राजनीतिक इतिहास को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि उनकी सियासी पारी यहीं खत्म हो जाएगी। बंगाल की राजनीति में उनका प्रभाव अब भी मजबूत है और आने वाले समय में वह नई रणनीति के साथ वापसी की कोशिश कर सकती हैं।
Location : West Bengal
Published : 4 May 2026, 2:25 PM IST