Rajgarh: ब्यावरा में अजनार नदी की कायापलट, 21 साल के ‘बिट्टू तबाही’ के जज्बे से बदली शहर की तस्वीर

राजगढ़ के ब्यावरा में 21 साल के बीएससी छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ 'बिट्टू तबाही' ने अकेले अजनार नदी की सफाई का बीड़ा उठाया। 26 जनवरी से शुरू हुई इस मुहिम में संक्रमण और सांपों जैसे खतरों से जूझते हुए उन्होंने नदी से कचरा और पॉलिथीन साफ किया। उनकी इस मेहनत से प्रेरित होकर अब नगर पालिका भी जेसीबी और पोकलेन मशीनों के साथ इस अभियान से जुड़ गई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 September 2026, 1:41 PM IST

Rajgarh: कहते हैं कि किसी बड़े बदलाव की शुरुआत करने के लिए हमेशा किसी बड़े दल या विशाल संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि इसके लिए केवल मजबूत इरादों और जज्बे की जरूरत होती है। राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है महज 21 साल के एक युवा ने। बीएससी के छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर लोग ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जानते हैं, ने शहर की जीवनदायिनी कही जाने वाली अजनार नदी की कायापलट करने का बीड़ा उठाया है। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी आज पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

अकेले शुरू की थी सफाई की मुहिम

सुरेंद्र ने इस नेक काम की शुरुआत पूरी तरह अकेले की थी। 26 जनवरी से उन्होंने अजनार नदी में उतरकर उसमें बरसों से जमा कचरा, पॉलिथीन और गंदगी को अपने हाथों से बाहर निकालना शुरू किया। शुरुआत के दिनों में जब लोग नदी के बीचों-बीच एक युवक को अकेले कचरा साफ करते देखते थे, तो वे हैरान रह जाते थे। कई लोग इसे सनक या नासमझी भी समझते थे, लेकिन सुरेंद्र के इरादे चट्टान जितने मजबूत थे। उन्होंने बिना किसी आधिकारिक मदद या बड़े अभियान का इंतजार किए बिना खुद ही सफाई का मोर्चा संभाल लिया।

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जोखिम और मुश्किलें बनीं परीक्षा

नदी की सफाई का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। स्थानीय मंदिर के आसपास नदी का यह हिस्सा लंबे समय से कचरे का ढेर बन चुका था। गंदे पानी और कचरे के बीच काम करने के कारण सुरेंद्र को हमेशा हाथ-पैर में संक्रमण (इन्फेक्शन) होने का गंभीर खतरा बना रहता था। इसके अलावा, सफाई अभियान के दौरान कई बार खतरनाक सांप भी उनके सामने आए, जिन्होंने जान का जोखिम पैदा किया। इन तमाम शारीरिक और मानसिक चुनौतियों के बावजूद, सुरेंद्र ने एक पल के लिए भी पीछे हटने से इंकार कर दिया और अपना अभियान जारी रखा।

शहर की पहचान बचाने का संकल्प

सुरेंद्र का मानना है कि अजनार नदी सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि उनके शहर ब्यावरा की पहचान और धरोहर का अहम हिस्सा है। समय के साथ लोगों की लापरवाही और लगातार फेंके जा रहे कचरे ने इस ऐतिहासिक नदी की दशा बिगाड़ दी थी। इसी बात से आहत होकर उन्होंने ठाना कि वे चुपचाप तमाशबीन बनकर नहीं बैठेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य केवल नदी के एक हिस्से को साफ करना नहीं है, बल्कि इसके जरिए समाज को यह बड़ा संदेश देना है कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखना केवल सरकार या प्रशासन का काम नहीं, बल्कि हम सबका नैतिक दायित्व है।

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जुनून ने जगाया प्रशासन, अब मशीनों से हो रहा काम

एक कहावत है कि सच्ची लगन रंग लाती है। सुरेंद्र की इस निष्ठा और कड़ी मेहनत का असर आखिरकार देखने को मिला। जब शहरवासियों ने एक अकेले लड़के को इस तरह पसीना बहाते देखा, तो धीरे-धीरे उनका नजरिया बदलने लगा। इस बदलाव को देखते हुए नगर पालिका भी खुद को पीछे नहीं रख सकी और मदद के लिए आगे आई। अब नदी से पुराने समय के भारी कचरे और पॉलिथीन के विशाल अंबार को हटाने के लिए नगर पालिका द्वारा जेसीबी और पोकलेन जैसी भारी मशीनें मुहैया कराई जा रही हैं।

ड्रोन के दृश्यों ने बयां की बदलाव की नई कहानी

आज ड्रोन कैमरों से अजनार नदी के जो दृश्य सामने आ रहे हैं, वे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यदि नीयत साफ हो तो तस्वीर कैसे बदलती है। कभी जिस नदी के घाट और किनारे कचरे और गंदगी के ढेर से पटे रहते थे, आज वहां साफ-सुथरा नजारा दिखाई देने लगा है। 'बिट्टू तबाही' के नाम से मशहूर हुए सुरेंद्र सिंह चौधरी की यह पहल आज पूरे समाज के लिए एक जीवंत मिसाल बन चुकी है, जो यह सिखाती है कि यदि एक व्यक्ति भी बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए, तो पूरा कारवां और प्रशासन उसके साथ चल पड़ता है।

Location :  Rajgarh

Published :  5 September 2026, 1:40 PM IST