
एटीएस की देशव्यापी छापेमारी (Source: Google)
Pune: पुणे के व्यस्त हडपसर इलाके में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक अस्पताल के समीप बम जैसी दिखने वाली संदिग्ध वस्तु मिलने की सूचना मिली। इस खबर ने स्थानीय नागरिकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तत्काल पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुणे पुलिस ने तुरंत बम निरोधक दस्ते (BDDS) और डॉग स्क्वायड को मौके पर बुलाया। सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए फायर ब्रिगेड की टीमों को भी स्टैंडबाय पर रखा गया। पुलिस अधिकारियों ने सबसे पहले अस्पताल और आसपास की इमारतों से लोगों को सुरक्षित दूरी पर हटाया, ताकि विशेषज्ञों की टीम बिना किसी बाधा के अपनी जांच प्रक्रिया को अंजाम दे सके।
विशेषज्ञों की टीम ने संदिग्ध वस्तु को सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में ले लिया और उसे परीक्षण के लिए लैब भेज दिया गया है। फिलहाल हडपसर पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि वह वस्तु वास्तव में विस्फोटक थी या केवल किसी की शरारत, लेकिन इस घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी बीच, पुणे में सुरक्षा से जुड़ा एक और गंभीर मामला सामने आया है। महाराष्ट्र एटीएस (ATS) ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के संपर्क में आए संदिग्धों के खिलाफ एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया है। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर पता चला कि भट्टी डिजिटल माध्यमों से भारतीय युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहा था और किसी बड़ी आतंकी घटना की साजिश रच रहा था।
पुणे एटीएस के एसपी के मुताबिक, इस ऑपरेशन के तहत देश के अलग-अलग शहरों में कुल 57 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इन 57 संदिग्धों में से 4 लोग पुणे शहर के निवासी पाए गए हैं। हालांकि इस कार्रवाई के दौरान अभी तक किसी को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया है, लेकिन एटीएस ने सभी संदिग्धों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए हैं।
छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन लोगों ने किसी घटना के लिए आर्थिक मदद ली थी या वे किसी स्लीपर सेल का हिस्सा थे। पुलिस का कहना है कि संदिग्धों के डिवाइस से मिले डेटा के आधार पर आगे की कार्रवाई और संभवतः गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।
Location : Pune
Published : 14 May 2026, 7:13 AM IST