
BRICS संसदीय फोरम में ओम बिरला का बड़ा संदेश (IMG: X)
New Delhi: नई दिल्ली में 12वें BRICS संसदीय फोरम के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया का ध्यान खींचते हुए सदस्य देशों से एकजुट होकर इस खतरे का मुकाबला करने की अपील की है। उन्होंने साफ कहा कि आतंकवाद केवल किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सामने गंभीर मानवीय और वैश्विक चुनौती है। भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए बिरला ने सीमा पार आतंकवाद पर रोक लगाने, आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद बंद करने और खुफिया सूचनाएं साझा करने जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करने की जरूरत बताई।
12वें BRICS संसदीय फोरम की अध्यक्षता करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आतंकवाद को वैश्विक शांति, सुरक्षा और मानवता के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि भारत लगातार आतंकवाद का विरोध करता आया है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इसके खिलाफ अपना रुख स्पष्ट करता रहा है। भारत की नीति आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की रही है। बिरला ने उम्मीद जताई कि BRICS देशों के संसदीय प्रतिनिधि आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार-विमर्श करेंगे। खासतौर पर सीमा पार आतंकवाद को रोकने, आतंकवादी संगठनों की फंडिंग पर लगाम लगाने और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान को मजबूत करने जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
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इस बार 12वें BRICS संसदीय फोरम का मुख्य विषय ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को बढ़ावा देना’ रखा गया है। इसका उद्देश्य संसदीय संस्थाओं की भूमिका को मजबूत करने और विकास से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विचार करना है। लोकसभा अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा से साझा सहमति विकसित होगी और पिछले सम्मेलनों की परंपरा के अनुरूप संयुक्त घोषणापत्र जारी किया जा सकेगा। इस घोषणापत्र के जरिए सदस्य देशों की साझा प्राथमिकताओं और सहयोग के क्षेत्रों को सामने लाने की उम्मीद है।
BRICS संसदीय फोरम में ओम बिरला का बड़ा संदेश (IMG: X)
दो दिवसीय सम्मेलन में चार उच्च स्तरीय सत्रों के दौरान कई समकालीन विषयों पर चर्चा की जा रही है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का जिम्मेदार इस्तेमाल, डिजिटल बदलाव, वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और सतत विकास प्रमुख हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में तकनीक के जिम्मेदार उपयोग, उसके प्रभाव और उससे जुड़े नियामकीय सवालों पर विभिन्न देशों के बीच संवाद महत्वपूर्ण हो गया है। संसदीय मंच पर इस विषय पर चर्चा से तकनीक के इस्तेमाल को लेकर साझा समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है।
नई दिल्ली के संविधान सदन में 26 और 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस फोरम में BRICS सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। रूस, चीन, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र समेत कई देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी इस सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय महत्व देती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं। BRICS देशों के बीच संसदीय संवाद का उद्देश्य विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना और साझा हितों से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना है। आतंकवाद, तकनीकी बदलाव और विकास जैसे विषयों पर सदस्य देशों की चर्चाएं इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाओं के साथ-साथ प्रस्तावित संयुक्त घोषणापत्र पर भी नजर रहेगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उम्मीद जताई है कि सदस्य देशों के बीच सहमति के आधार पर इसे जारी किया जाएगा। हालांकि, घोषणापत्र में किन मुद्दों को अंतिम रूप से शामिल किया जाएगा, यह सम्मेलन की चर्चाओं और सदस्य देशों के बीच बनने वाली सहमति पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, 12वां BRICS संसदीय फोरम सुरक्षा से लेकर तकनीक और सतत विकास तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद का मंच बन रहा है। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को लेकर ओम बिरला का संदेश इस आयोजन के प्रमुख बिंदुओं में शामिल है। अब यह देखना अहम होगा कि दो दिवसीय चर्चा से सदस्य देशों के बीच किन साझा प्राथमिकताओं पर सहमति बनती है और संयुक्त घोषणापत्र में उन्हें किस रूप में जगह मिलती है।
Location : New Delhi
Published : 26 October 2026, 11:44 AM IST