
प्रतीकात्मक छवि (Source: X)
New Delhi: नेपाल में एक बार फिर हिंदू राष्ट्र की मांग तेज होती दिखाई दे रही है। काठमांडो से शुरू हुई यह मांग अब भारत की सीमा से लगे तराई-मधेश के इलाकों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हिंदू संगठनों की ओर से सरकार पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और नेपाल की सांविधानिक पहचान पर दोबारा विचार करने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, अभी तक नेपाल सरकार ने देश को हिंदू राष्ट्र बनाने का कोई फैसला नहीं लिया है।
हिंदू संगठनों के अनुसार, आंदोलन की गतिविधियां काठमांडो के अलावा भारत की सीमा से लगे मोरंग, सुनसरी, सप्तरी, सिरहा, बारा, पर्सा और रौतहट जैसे इलाकों तक पहुंच रही हैं। इन जिलों में हिंदू राष्ट्र की बहाली को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज होने का दावा किया जा रहा है।
नेपाल के आधिकारिक पर्यटन बोर्ड के अनुसार मधेश क्षेत्र में बारा, पर्सा, रौतहट, सिरहा और सप्तरी समेत आठ जिले शामिल हैं। यह इलाका नेपाल के दक्षिणी मैदानी क्षेत्र यानी तराई में आता है और भारत से इसकी भौगोलिक तथा सामाजिक निकटता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त हिंदू मोर्चा की ओर से गृह मंत्री सुदन गुरुंग को ज्ञापन सौंपकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की गई है। संगठनों का कहना है कि सरकार को तीन महीने के भीतर सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर नेपाल की सांविधानिक पहचान पर चर्चा करनी चाहिए।
हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच हुई बातचीत में धार्मिक सौहार्द, सुरक्षा और धार्मिक संस्थानों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की बात सामने आई है।
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इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हिंदू राष्ट्र की मांग और सरकार के फैसले को एक नहीं माना जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने संगठनों को अपनी मांग रखने का अवसर दिया है, लेकिन इसे हिंदू राष्ट्र की बहाली पर औपचारिक समझौता या फैसला नहीं माना गया है।
नेपाल वर्ष 2008 में गणतांत्रिक व्यवस्था की ओर बढ़ा और देश की वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था नेपाल को धर्मनिरपेक्ष संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में परिभाषित करती है। इसलिए हिंदू राष्ट्र की बहाली के लिए बड़ी राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया की जरूरत होगी।
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हिंदू राष्ट्र की मांग का असर भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बन रहा है। रुपईडीहा-नेपालगंज जैसे इलाकों में दोनों देशों के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों के कारण नेपाल की सांविधानिक पहचान से जुड़ा कोई भी बड़ा राजनीतिक बदलाव सीमा क्षेत्रों में भी चर्चा पैदा कर सकता है।
हालांकि, फिलहाल सीमा क्षेत्र में जनजीवन सामान्य बताया जा रहा है और हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
हिंदू संगठनों की मांग अब सरकार और राजनीतिक दलों के सामने है। संगठन चाहते हैं कि सर्वदलीय बैठक के जरिए इस मुद्दे पर औपचारिक चर्चा हो और आगे की प्रक्रिया के लिए समयसीमा तय की जाए।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मांग सिर्फ राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के आंदोलन तक सीमित रहेगी या आने वाले दिनों में नेपाल की सत्ता और संविधान में बदलाव की बहस को नई दिशा देगी। सरकार की अगली राजनीतिक प्रक्रिया ही तय करेगी कि यह आंदोलन कितना प्रभावी होता है।
Location : New Delhi
Published : 9 August 2026, 9:53 AM IST
Topics : Hindu Rashtra India Nepal border nepal news