
अयोध्या राम मंदिर (Image Source: Pinterest)
Chhindwara: उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में राम मंदिर गबन मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब इसकी चिंगारी मध्य प्रदेश तक पहुंच चुकी है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने इस मामले पर बड़ा बयान दिया है ।
दरअसल धार्मिक माहौल के बीच शंकराचार्य ने देश के वर्तमान धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर में दान राशि की कथित चोरी और भ्रष्टाचार के मामलों पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया।
शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि देश-विदेश से श्रद्धालु अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई भगवान के चरणों में समर्पित करते हैं। इस दान राशि का उपयोग धार्मिक और सामाजिक उत्थान के लिए होना चाहिए। ऐसे में ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किया गया कथित भ्रष्टाचार न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ और विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को सनातन धर्म और भगवान के कार्यों से जुड़ा बताते हैं, अगर वही ऐसा कृत्य करें, तो यह और भी अधिक पीड़ादायक हो जाता है।
शंकराचार्य ने मंदिरों के सरकारीकरण और प्रबंधन व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को सनातन धर्म के विधि-विधान, पूजा-पद्धति, धार्मिक नैतिकता और आध्यात्मिक व्यवस्थाओं की पर्याप्त समझ नहीं होती। इसलिए देशभर के मंदिरों के संरक्षण और संचालन के लिए एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण बोर्ड’ या समिति का गठन होना चाहिए। इस समिति में केवल धर्म के जानकार, विशेषज्ञ और अनुभवी लोगों को ही शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति जिस क्षेत्र का विशेषज्ञ है, वही उसका संचालन बेहतर ढंग से कर सकता है।
धर्मांतरण और लव जिहाद के मुद्दों पर बोलते हुए शंकराचार्य ने कहा कि किसी भी देश या समाज में 'संख्या बल' का बहुत बड़ा महत्व होता है। जिसकी संख्या अधिक होगी, वही देश की व्यवस्था और सत्ता पर प्रभाव रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत देश में धर्मांतरण और लव जिहाद जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार और समाज इस गंभीर खतरे को भांप नहीं पा रहे हैं, जबकि संत समाज लगातार जनजागरण के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने शासन से इन मामलों पर रोक लगाने के लिए तत्काल कठोर कानून बनाने की मांग की।
बड़े धार्मिक ट्रस्टों में डिजिटल ऑडिट और दान की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग (RTM) न होने के कारण ऐसी विसंगतियां सामने आती हैं। यदि ट्रस्ट की वेबसाइट पर हर दान और खर्च का लाइव ब्यौरा हो, तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
कानूनी सुरक्षा और वीआईपी कल्चर:स्थानीय स्तर पर श्रद्धालुओं की यह भी शिकायत रही है कि मंदिरों में वीआईपी संस्कृति बढ़ने से आम भक्तों की अनदेखी होती है और चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी तरह पारदर्शिता नहीं रखी जाती, जिसके लिए सख्त वित्तीय नियमावली की जरूरत है।
Location : Chhindwara
Published : 22 June 2026, 12:18 PM IST