
प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest)
New Delhi : स्मार्टफोन आज बच्चों की पढ़ाई और मनोरंजन का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी बढ़ती लत और महंगे गैजेट खरीदने का दबाव चिंता का कारण बन रहा है। हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें मोबाइल, ऑनलाइन गेमिंग या महंगे फोन को लेकर विवाद के बाद परिवारों को बेहद दुखद परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं ने माता-पिता के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों को मोबाइल देने की सीमा आखिर क्या होनी चाहिए?
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में 19 वर्षीय युवक द्वारा महंगा iPhone खरीदने और उसकी EMI को लेकर परिवार से विवाद की घटना सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, EMI के भुगतान को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हुआ। युवक के पहाड़ी क्षेत्र में चले जाने के बाद परिवार उसे समझाने पहुंचा, लेकिन घटना में युवक और उसके माता-पिता की मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
राजस्थान के कोटा में 16 वर्षीय कक्षा 11 के छात्र को मोबाइल पर गेम खेलने से रोकने और फोन लिए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। पुलिस और परिवार के अनुसार, उसने जहरीला पदार्थ खा लिया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार ने बताया कि वह मोबाइल पर काफी समय बिताता था।
गुजरात के सूरत में कक्षा 7 के 13 वर्षीय छात्र की मौत का मामला भी सामने आया। पुलिस के मुताबिक, बच्चा वीडियो गेम खेलने में काफी समय बिताता था। पिता ने उसे फोन छोड़कर होमवर्क करने को कहा था। इसके बाद घर में विवाद हुआ और किशोर ने कथित तौर पर अपनी जान ले ली।
उत्तर प्रदेश के मऊ में 14 वर्षीय कक्षा 6 के छात्र की मौत का मामला सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी मां ने ऑनलाइन गेमिंग की आदत कम करने के लिए मोबाइल रिचार्ज कराने से मना कर दिया था। इसके बाद घर में विवाद हुआ और छात्र ने कथित तौर पर आत्मघाती कदम उठा लिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।
केरल के कोच्चि में 13 वर्षीय लड़की की मौत का मामला भी मोबाइल इस्तेमाल से जुड़ा बताया गया। प्रारंभिक पुलिस जांच के अनुसार, बच्ची को लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने को लेकर पिता ने डांटा था। इसके बाद वह गंभीर भावनात्मक तनाव में थी। पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच की।
इन घटनाओं से यह सवाल जरूर उठता है कि मोबाइल और गेमिंग बच्चों की जिंदगी में कितनी जगह ले चुके हैं। विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक, बच्चों पर अचानक मोबाइल बंद करने या छीन लेने के बजाय उनसे बातचीत, स्क्रीन टाइम की स्पष्ट सीमा और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग ज्यादा प्रभावी हो सकती है।
वहीं महंगे फोन और EMI के मामले में माता-पिता को बच्चों की जिद के दबाव में ऐसी खरीदारी से बचना चाहिए, जिसे परिवार की आर्थिक स्थिति संभाल न सके। एक महंगा फोन जीवन की जरूरत नहीं है, लेकिन उसके लिए लिया गया कर्ज परिवार पर लंबे समय तक दबाव डाल सकता है।
सबसे जरूरी बात: अगर बच्चा मोबाइल छीनने, गेम बंद कराने या किसी आर्थिक समस्या के बाद असामान्य रूप से परेशान, चुप या आक्रामक नजर आए, तो इसे सिर्फ जिद समझकर नजरअंदाज न करें। उससे शांत होकर बात करें और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें।
Location : New Delhi
Published : 23 August 2026, 12:59 PM IST
Topics : Mobile Addiction Parenting Technology News