रसोई गैस बुकिंग को लेकर बुधवार को नया अपडेट आया है। गैस की कालाबाजारी और किल्लत को रोकने के लिए गैस कंपनियों ने रसोई गैस बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब इन नियमों के तहत उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर मिलेंगे।

गैस किल्लत के बीच आया बड़ा अपडेट (Img: Internet)
New Delhi: इजरायल-ईरान युद्ध को लेकर देश में रसोई गैस के लिए मारामारी मची है। उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए पापड़ बेलने पर रहे हैं। इसे देखते हुए गैस कंपनियों ने एलपीजी बुकिंग में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग की समय सीमा अलग-अलग तय कर दी गई है।
नई व्यवस्था के अनुसार उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए 14.2 किलोग्राम वाले सिलिंडर की बुकिंग का अंतर बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। वहीं, सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह सीमा 25 दिन निर्धारित की गई है। 10 किलो वाले कंपोजिट सिलिंडर 18 दिन में मिलेगा। वहीं 5 किलो घरेलू सिलिंडर के लिए शहरी क्षेत्र में नौ दिन व ग्रामीण क्षेत्र में 16 दिन का अंतराल तय किया है।
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गैस सिलेंडर की किल्लत और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए तेल कंपनियों ने सॉफ्टवेयर में बड़े तकनीकी बदलाव किए हैं। अब दो सिलेंडर वाले ग्राहकों को रिफिल बुक करने के लिए कम से कम 35 दिनों का इंतजार करना होगा। जिला पूर्ति अधिकारी के मुताबिक यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
उज्ज्वला लाभार्थियों को 16 दिन में छोटू सिलेंडर मिलेगा। अब दो सिलेंडर वाले उपभोक्ता 35 दिन बाद गैस बुकिंग करा सकेंगे। बता दें कि नए नियम शहरी-ग्रामीण सभी क्षेत्रों में लागू होंगे। तय सीमा से पहले बुकिंग पर सिस्टम स्वतः ब्लॉक कर देगा।
वहीं, होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा जैसी आवश्यक सेवाओं को केवल 10 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। गैस सिलेंडरों की किल्लत के बीच अगर कोई एजेंसी, बिचौलिया या व्यक्ति जमाखोरी या घरेलू सिलिंडर का व्यावसायिक उपयोग में लिप्त पाया गया, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पूर्ति विभाग को निर्देश दिए कि इस नई व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए ताकि वास्तविक उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।
सरकार और कंपनियों का कहना है कि इन नए नियमों से गैस की सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा। इससे कालाबाजारी पर रोक लगेगी और जरूरतमंद लोगों तक गैस सही समय पर पहुंचेगी। ये नए नियम उपभोक्ताओं के लिए थोड़े मुश्किल जरूर हैं, लेकिन लंबे समय में गैस की सही सप्लाई और पारदर्शिता लाने के लिए इन्हें जरूरी माना जा रहा है।