
अलग होमलैंड और नरसंहार कानून लागू करने की मांग (Image: Dynamite News)
Jammu-Kashmir News: जम्मू में एक बार फिर कश्मीरी हिंदुओं की आवाज सड़कों पर सुनाई दी। विस्थापन, सुरक्षा और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर बड़ी संख्या में कश्मीरी हिंदू समुदाय के लोग प्रदर्शन के लिए उतरे। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस दौरान सुरक्षित घाटी वापसी, विशेष रोजगार पैकेज, बढ़ी हुई राहत राशि और कश्मीरी हिंदुओं के लिए अलग होमलैंड की मांग प्रमुख रही।
जम्मू के प्रदर्शनी मैदान के बाहर यूथ ऑल इंडिया कश्मीरी समाज के बैनर तले प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से विस्थापित समुदाय के पुनर्वास और सुरक्षा को लेकर प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उनका कहना था कि कई वर्षों से कश्मीरी हिंदू समुदाय अपनी समस्याओं के समाधान का इंतजार कर रहा है। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने घाटी में वापसी के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और विस्थापित परिवारों को मिलने वाली सहायता राशि में बढ़ोतरी की मांग उठाई।
इसी बीच पनुन कश्मीर ने कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। संगठन के महासचिव कुलदीप रैना ने संगठन की ओर से यह ज्ञापन प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपा। यह ज्ञापन 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद उठाए गए कदमों की अगली कड़ी बताया गया है। ज्ञापन में संगठन ने कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन को लेकर राजनीतिक, संवैधानिक और कानूनी समाधान की मांग रखी है।
पनुन कश्मीर ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें कश्मीरी हिंदुओं के कथित नरसंहार को औपचारिक मान्यता देना, व्यापक जनसंहार कानून बनाना और घाटी में कश्मीरी हिंदू समुदाय के लिए अलग, सुरक्षित और संवैधानिक रूप से संरक्षित होमलैंड की स्थापना शामिल है। संगठन ने साल 2020 में प्रस्तावित अपने नरसंहार बिल को लागू करने की मांग भी दोहराई है। पनुन कश्मीर का कहना है कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में विस्थापन के मुद्दे को केवल माइग्रेशन, राहत और पुनर्वास तक सीमित कर दिया गया है।
ज्ञापन में हिंसा के दौरान जले और नष्ट हुए मकानों व संपत्तियों के लिए लंबित एक्स-ग्रेशिया राशि जारी करने की मांग भी उठाई गई है। संगठन का दावा है कि घोषित सहायता राशि का एक हिस्सा ही प्रभावित परिवारों तक पहुंच पाया है और बड़ी राशि अभी भी लंबित है। इसके अलावा प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीर में कार्यरत कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया है। संगठन ने कर्मचारियों का सुरक्षा आकलन कराने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सामूहिक रूप से घाटी से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की है।
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Location : Jammu-Kashmir
Published : 19 September 2026, 1:36 PM IST