
जिंदल स्टील (सोर्स: डाइनामाइट न्यूज़)
New Delhi: नई दिल्ली में भारतीय स्टील इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। जिंदल स्टील ने उन्नत कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के जरिए स्वदेशी कोयले को साफ गैस यानी Syngas में बदलकर उससे Direct Reduced Iron (DRI) बनाने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि दुनिया में पहली बार इस तकनीक का इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हुए स्टील उत्पादन की दिशा में एक नया मॉडल पेश किया गया है।
सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी ने विदेशी गैस या महंगे आयातित कोयले पर निर्भर रहने के बजाय देश में उपलब्ध कोयले को आधुनिक तकनीक के जरिए गैस में बदलकर स्टील उत्पादन की नई राह खोल दी है। इससे न सिर्फ उत्पादन लागत कम होगी, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
कंपनी के मुताबिक प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन जैसे ईंधनों की कमी को देखते हुए अब गैल्वनाइजिंग और कलर कोटिंग लाइन भट्टियों में भी सिनगैस का सफल इस्तेमाल किया गया है। स्टील इंडस्ट्री में यह प्रयोग पहली बार किया गया है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन चुकी है और ऐसे में सिनगैस का उपयोग उद्योगों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।
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जिंदल स्टील ने सिनगैस के जरिए ब्लास्ट फर्नेस को संचालित कर एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। इससे आयातित कोकिंग कोल पर देश की निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है। साथ ही प्रति टन स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन को भी उल्लेखनीय रूप से कम किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील उत्पादन की पूरी वैल्यू चेन में सिनगैस का उपयोग भविष्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।
भारत सरकार भी राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन के तहत इस तकनीक को बढ़ावा दे रही है।आने वाले समय में इस क्षेत्र में नीतिगत समर्थन और प्रोत्साहनों के चलते कोयला गैसीफिकेशन तकनीक को अपनाने की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है। इससे देश में ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ औद्योगिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।
इस उपलब्धि पर Jindal Steel Angul के कार्यकारी निदेशक पी.के. बीजू नायर ने कहा कि स्वदेशी उत्प्रेरक से तैयार सिनगैस भविष्य में महंगी आयातित मेथनॉल, अमोनिया और एलएनजी की जगह ले सकता है। उनका कहना है कि भारत के पास कोयले के विशाल भंडार मौजूद हैं और अगर इन्हें आधुनिक तकनीक के साथ इस्तेमाल किया जाए तो देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को काफी हद तक खुद पूरा कर सकता है।
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उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोयला गैसीफिकेशन के साथ कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) तकनीक को जोड़ा जाए तो प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही इससे भारत का स्टील अंतरराष्ट्रीय मानकों, खासकर CBAM जैसे नियमों पर भी खरा उतर सकेगा और वैश्विक बाजार में और मजबूत स्थिति हासिल करेगा।
स्वदेशी कोयले के बेहतर उपयोग और स्वच्छ तकनीक के साथ जिंदल स्टील अब सस्टेनेबल और किफायती स्टील उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ स्टील इंडस्ट्री को नई दिशा मिलेगी, बल्कि यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
जिंदल स्टील भारत के प्रमुख स्टील उत्पादकों में शामिल है और अपनी उच्च गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक के लिए विश्व स्तर पर पहचान रखता है। कंपनी का “Mine-to-Metal” मॉडल इसे खास बनाता है, जिसमें खदान से लेकर तैयार स्टील तक पूरी प्रक्रिया अपने संसाधनों और तकनीक से पूरी की जाती है।
करीब 12 बिलियन डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये) से अधिक निवेश के साथ कंपनी के अत्याधुनिक स्टील प्लांट अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में स्थित हैं। जिंदल स्टील भारत के साथ-साथ अफ्रीका सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मजबूत उपस्थिति रखता है।
Location : New Delhi
Published : 6 April 2026, 2:50 PM IST