Ranchi: खाकी की छाया में 14 जिलों में करोड़ों का खेल, अब खुलने लगे सिस्टम के बड़े राज!

झारखंड के वेतन घोटाले में हर दिन नई परतें खुल रही हैं, लेकिन असली कहानी अब भी अधूरी है। बोकारो से शुरू हुआ यह मामला 14 जिलों तक फैल चुका है और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन सामने आ चुके हैं। क्या यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी है या किसी बड़े सिस्टम का छिपा सच?

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 1 May 2026, 10:41 AM IST

Ranchi: झारखंड में कोषागार से जुड़े कथित वेतन घोटाले की जांच अब एक साधारण वित्तीय अनियमितता से कहीं बड़ा रूप ले चुकी है। शुरुआत में मामला कुछ सिपाहियों और दरोगाओं तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे फाइलें खुलती गईं, वैसे-वैसे इस पूरे नेटवर्क की परतें उधड़ने लगीं। अब जांच का दायरा बढ़कर 14 जिलों तक पहुंच चुका है, जहां अनियमित भुगतान और संदिग्ध ट्रांजेक्शन के गंभीर संकेत मिले हैं।

बोकारो ट्रेजरी से शुरू हुआ ‘करोड़ों का सुराग’

इस पूरे मामले की पहली बड़ी कड़ी बोकारो ट्रेजरी से सामने आई, जहां शुरुआती जांच में ही करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन के संकेत मिले। धीरे-धीरे यह आंकड़ा 30 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच गया। इसके बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों के कोषागार की व्यापक जांच के आदेश दिए, जिससे पूरे सिस्टम में हड़कंप मच गया।

Jharkhand: देवघर में पुलिस का एक्शन, अवैध हथियार के साथ तीन गिरफ्तार

नियमों की अनदेखी या सुनियोजित सिस्टम?

जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि कुछ जिलों में तत्कालीन स्तर के अधिकारियों ने अपने पदनाम पर बैंक खाते खुलवाए और ट्रेजरी से सीधे भुगतान इन्हीं खातों में करवाए। नियमों के मुताबिक यह पूरी तरह अवैध प्रक्रिया मानी जाती है। इसके बाद चेक के जरिए पैसे का वितरण किया गया, जिससे नियंत्रण एक ही जगह केंद्रित रहा और निगरानी कमजोर पड़ती गई।

2016-17 के रिकॉर्ड में छिपा बड़ा खेल

वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान हुए बड़े पैमाने पर भुगतान अब जांच का मुख्य केंद्र हैं। जमशेदपुर में करीब 38 लाख रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले हैं, जबकि अन्य जिलों में भी इसी तरह के पैटर्न सामने आ रहे हैं। लेखा परीक्षक विभाग और वित्तीय टीमें पुराने रिकॉर्ड को खंगालने में जुटी हैं।

Jharkhand: देवघर में पुलिस का एक्शन, अवैध हथियार के साथ तीन गिरफ्तार

दस्तावेजों की बरामदगी

मामले की जांच CID को सौंपी गई है। बोकारो से लेकर हजारीबाग तक कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं। एक आरोपी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच सिर्फ निचले स्तर तक ही सीमित रहेगी या फिर असली मास्टरमाइंड तक पहुंचेगी?

डेटा गायब होने से बढ़ा शक

जांच के दौरान पुलिस विभाग के अंदरूनी रिकॉर्ड सिस्टम से छेड़छाड़ की आशंका भी सामने आई है। कुछ महत्वपूर्ण डेटा गायब होने और रिकॉर्ड में बदलाव के संकेत मिले हैं।

कौन है असली खिलाड़ी?

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पूरा नेटवर्क सामने आने लगा है। कई जिलों में एक ही तरह के पैटर्न मिले हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह कोई अलग-अलग घटनाएं नहीं बल्कि एक संगठित सिस्टम का हिस्सा हो सकता है। अब जांच एजेंसियों का फोकस पैसे के पूरे फ्लो को ट्रेस करने पर है।

सिस्टम के अंदर छिपा ‘वेतन सिंडिकेट’?

जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में एक ही कर्मचारी के नाम पर दो बार वेतन निकासी हुई। यह पैटर्न बताता है कि मामला किसी गलती का नहीं बल्कि सुनियोजित ढांचे का हिस्सा हो सकता है। अब जांच एजेंसियां इसे “वेतन सिंडिकेट” के रूप में भी देख रही हैं।

अब जांच का रुख तेज़ी से ऊपरी स्तर की ओर बढ़ रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े खुलासे और हाई-प्रोफाइल कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

Location :  Deoghar

Published :  1 May 2026, 10:30 AM IST