
बाबाधाम की नगरी में डिजिटल पेमेंट पर नई आफत (Img: Pinterest)
Deoghar: भारत में डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ा है। खासकर यूपीआई ने शहर से लेकर गांव और छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक भुगतान की पूरी तस्वीर बदल दी है। अब जेब में नकदी रखने के बजाय मोबाइल से कुछ सेकेंड में भुगतान करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। ऐसे में यूपीआई भुगतान को लेकर प्रस्तावित नया शुल्क कारोबार जगत में चर्चा का विषय बन गया है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर कारोबारियों से 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लिए जाने की बात सामने आई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने की बात कही जा रही है। हालांकि ग्राहकों से सीधे इस शुल्क की वसूली की अनुमति नहीं होगी। इसी वजह से कारोबारियों के बीच यह चिंता है कि भुगतान का अतिरिक्त खर्च आखिरकार उनके व्यापारिक मार्जिन को ही प्रभावित करेगा।
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UPI Payment New Rule: 2000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज, देवघर के कारोबारियों में क्यों मची खलबली!#NewUPIPaymentRule #traders #Deoghar #DynamiteNews @DCDeoghar pic.twitter.com/K2Fe4jyIOq
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) September 18, 2026
देवघर में इस प्रस्तावित बदलाव का असर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बाबा बैद्यनाथ की नगरी में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। पूजा सामग्री, होटल, भोजन, परिवहन, प्रसाद और अन्य बाजारों में डिजिटल भुगतान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। कारोबारियों का कहना है कि यहां ग्राहक अक्सर नकदी के बजाय मोबाइल से भुगतान करना पसंद करते हैं।
शहर के कारोबारी एवं चेंबर के वरिष्ठ सदस्य निरंजन सिंह का कहना है कि डिजिटल लेनदेन ने कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ भुगतान को आसान बनाया है। उनके मुताबिक यदि डिजिटल भुगतान पर कारोबारी से अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा तो छोटे मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों के लिए इसका सीधा असर पड़ेगा। उनका यह भी तर्क है कि डिजिटल लेनदेन कम होने की स्थिति में नकद कारोबार बढ़ सकता है, जिससे लेनदेन की निगरानी और कर अनुपालन से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
वहीं फल कारोबार से जुड़े लखन जी का कहना है कि छोटे कारोबारियों के लिए प्रत्येक भुगतान पर अतिरिक्त कटौती का असर उनकी कमाई पर पड़ता है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो कई दुकानदार यूपीआई भुगतान को सीमित करने या वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
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मध्यम और लघु कारोबारियों की चिंता का एक दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है। कारोबारी चंदन कुमार के मुताबिक डिजिटल भुगतान अब ग्राहक की आदत का हिस्सा बन चुका है। ग्राहक को अचानक नकद भुगतान के लिए कहना आसान नहीं होगा। ऐसे में शुल्क का बोझ ग्राहक के बजाय कारोबारी को ही उठाना पड़ सकता है।
यूपीआई शुल्क को लेकर चिंता सिर्फ शहर के बाजार तक सीमित नहीं है। संथाल परगना के व्यापारिक संगठनों का कहना है कि देवघर, दुमका, पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा और जामताड़ा समेत पूरे क्षेत्र में बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और ग्रामीण कारोबारी डिजिटल भुगतान पर निर्भर हैं।
ग्रामीण बाजार की व्यापारिक व्यवस्था शहर से जुड़े छोटे दुकानदारों के माध्यम से चलती है। गांव-कस्बों के व्यापारी शहर से कुछ हजार रुपये का सामान खरीदकर उसे अपने क्षेत्र में बेचते हैं। इन कारोबारियों के ग्राहक भी अब यूपीआई के जरिए भुगतान करते हैं। ऐसे में यदि शहर के थोक या बड़े कारोबारी डिजिटल भुगतान पर शुल्क के कारण कैश में कारोबार को प्राथमिकता देने लगते हैं, तो ग्रामीण दुकानदारों के सामने नकदी की व्यवस्था करने की अतिरिक्त चुनौती खड़ी हो सकती है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि संथाल क्षेत्र में पहले से ही छोटे और सीमित पूंजी वाले कारोबारियों की संख्या अधिक है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत उनकी कार्यशील पूंजी और मुनाफे दोनों को प्रभावित कर सकती है।
एक तरफ यूपीआई ने देश में भुगतान को आसान और तेज बनाया है, वहीं दूसरी तरफ प्रस्तावित MDR को लेकर व्यापारी वर्ग में यह बहस शुरू हो गई है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ते हुए कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत का असर किस तरह पड़ेगा।
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देवघर के कारोबारियों का कहना है कि यूपीआई अब केवल सुविधा नहीं बल्कि व्यापार का जरूरी हिस्सा बन चुका है। इसलिए किसी भी नए शुल्क का प्रभाव सिर्फ दुकानदार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर शहर से लेकर ग्रामीण बाजार की पूरी व्यापारिक श्रृंखला पर पड़ सकता है। अब 15 अक्टूबर से प्रस्तावित नई व्यवस्था लागू होने के बाद देवघर और संथाल परगना के कारोबारी अपने डिजिटल भुगतान के तरीके में किस तरह बदलाव करते हैं, यह आने वाला समय बताएगा।
Location : Deoghar
Published : 18 September 2026, 4:35 PM IST