Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर कब होगा कान्हा का जन्म? जानें पूजा मुहूर्त, झांकी और लड्डू गोपाल के भोग के नियम

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आज देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भक्त व्रत रखकर मध्यरात्रि के निशीथ काल में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे। इस मौके पर पूजा के शुभ मुहूर्त, झांकी सजाने की विधि और लड्डू गोपाल को भोग लगाने के नियम जानना बेहद जरूरी है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 4 September 2026, 8:25 AM IST

New Delhi: शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में हुआ था। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और रात में निशीथ काल में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं। आइए जानते हैं जन्माष्टमी पर पूजा का शुभ समय, झांकी सजाने की विधि और लड्डू गोपाल को भोग लगाने के नियम।

जन्माष्टमी पर कब से शुरू करें व्रत?

जन्माष्टमी व्रत की तैयारी एक दिन पहले से शुरू करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले लोग एक दिन पहले सात्विक भोजन करते हैं और खान-पान में संयम रखते हैं। जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान और पूजा की शुरुआत की जा सकती है। पूरे दिन भक्त भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं और मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाते हैं।

ऐसे सजाएं कान्हा की झांकी

घर में जन्माष्टमी की झांकी बनाने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद चौकी पर पीला, लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर बाल गोपाल को विराजमान करें। झांकी को पालना, झूला, फूल, मोरपंख, बांसुरी और मिट्टी के दीपकों से सजाया जा सकता है।

जगह होने पर गोकुल या नंद भवन की थीम भी बनाई जा सकती है। इसमें मिट्टी की मटकियां, छोटे बर्तन और गाय-बछड़े की प्रतिमाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।

मध्यरात्रि में ऐसे करें बाल गोपाल की पूजा

निशीथ काल में पूजा स्थल को साफ करके भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद गंगाजल से स्नान कराएं और साफ कपड़े से भगवान को पोंछकर नई पोशाक पहनाएं। लड्डू गोपाल को मुकुट, मोरपंख, माला और अन्य आभूषणों से सजाएं।

इसके बाद भगवान को सुंदर झूले में विराजमान करें और जन्मोत्सव के गीत व भजन गाते हुए झूला झुलाएं। धूप-दीप जलाकर पूजा करें और अंत में भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें।

जन्माष्टमी पर चमका सोना: त्योहार की सुबह बढ़ीं कीमतें, दिल्ली से लखनऊ तक नई दरें जारी

4 सितंबर का शुभ चौघड़िया और निशीथ काल

जन्माष्टमी के दिन बताए गए प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं:

  • लाभ चौघड़िया: सुबह 7:35 बजे से 9:10 बजे तक
  • अमृत चौघड़िया: सुबह 9:10 बजे से 10:45 बजे तक
  • शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:20 बजे से 1:55 बजे तक
  • निशीथ काल: रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक

लड्डू गोपाल को लगाएं माखन-मिश्री का भोग

भगवान श्रीकृष्ण को बाल रूप में माखन-मिश्री प्रिय मानी जाती है। जन्माष्टमी पर भोग तैयार करते समय साफ-सफाई और सात्विकता का विशेष ध्यान रखें। भोग के साथ तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के बाद माखन-मिश्री समेत मिठाई और अन्य सात्विक पकवानों का भोग लगाया जा सकता है।

पूजा और भोग के बाद परिवार के सभी सदस्य भगवान श्रीकृष्ण से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।

Location :  New Delhi

Published :  4 September 2026, 8:25 AM IST