
द्रौपदी का मंचन
New Delhi : गुरुवार की शाम दिल्ली के भीम ऑडिटोरियम में जब द्रौपदी ने भरी सभा से अपना सवाल पूछा तो पूरा हॉल थम-सा गया। कुचिपुड़ी की मुद्राओं और भावों में यह सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं थी। यह एक ऐसा सवाल था, जो आज भी जवाब मांगता है।
संप्रदायम कल्चरल ट्रस्ट ने डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में कुचिपुड़ी नृत्य नाटिका 'द्रौपदी' पेश की। इसकी परिकल्पना और कोरियोग्राफी स्वाति सोमनाथ की थी, जिन्होंने द्रौपदी का किरदार भी निभाया। स्क्रिप्ट साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखिका वोल्गा ने लिखी। यहां द्रौपदी को शक्ति के रूप में दिखाया गया, जो सहती है, बचाती है और चुप रहने से इनकार करती है।
प्रस्तुति पांच हिस्सों में बंटी थी: मदर अर्थ, द्रौपदी का जन्म, वस्त्रहरण, द्रौपदी का प्रतिशोध और महाप्रस्थानम। शुरुआत धरती मां वसुंधरा से हुई, फिर यज्ञ की अग्नि से जन्म दिखाया गया। वस्त्रहरण में अपमान के बीच वह कृष्ण पर भरोसा करती है और अन्याय के खिलाफ बोलती भी है। आखिर में हिमालय की अंतिम यात्रा आती है।
कार्यक्रम का सबसे भारी पल वह था, जब द्रौपदी पूछती है कि युधिष्ठिर ने पहले खुद को हारा था या उसे। सभा में बैठे बुजुर्ग, गुरु और राजा कोई जवाब नहीं दे पाए। प्रस्तुति का जोर अपमान से ज्यादा इसी चुप्पी पर था। स्वाति सोमनाथ ने कहा, "द्रौपदी को उसके साथ हुए अन्याय के लिए याद किया जाता है। हम मंच पर वह दिखाना चाहते थे जो उसने किया। उसने सबसे ताकतवर लोगों से सवाल किया और पूछना बंद नहीं किया।"
संगीत गरिमेल्ला गोपालकृष्ण का था और संगीत निर्देशन एन. सुरेश प्रसाद का। मंच पर डी. मेहर प्रभाकर, लोका चंद्रशेखर रेड्डी, उप्पाडा गीतिका और कोर्रा बालाराम ने भी प्रस्तुति दी।
ट्रस्ट श्रीकाकुलम में नागावली नदी किनारे 12 एकड़ के कैंपस में गुरुकुल चलाता है। यहां ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों को मुफ्त या रियायती पढ़ाई, रहना और प्रशिक्षण मिलता है।
Location : New Delhi
Published : 22 October 2026, 10:09 PM IST