‘मानवाधिकार सिर्फ अवधारणा नहीं’, NHRC के कार्यक्रम में CJI सूर्यकांत का बड़ा संदेश

CJI सूर्यकांत ने NHRC के स्थापना दिवस पर कहा कि संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर अदालतों को हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने मानवाधिकार आयोगों से व्यवस्था की कमियां पहचानने और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने पर जोर दिया।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 12 October 2026, 1:14 PM IST
नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि जब संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो अदालतों को हस्तक्षेप करना चाहिए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्थापना दिवस कार्यक्रम में उन्होंने मानवाधिकार आयोगों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें शिकायतों की जांच करने के साथ-साथ व्यवस्था की कमियों की पहचान भी करनी चाहिए, ताकि उन समस्याओं पर संस्थागत स्तर पर ध्यान दिया जा सके जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

मानवाधिकार सिर्फ अवधारणा नहीं, बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं

CJI सूर्यकांत ने कहा कि मानवाधिकार कोई अमूर्त अवधारणा नहीं हैं। इनका सीधा संबंध स्वास्थ्य, भोजन, आश्रय, आजीविका और स्वच्छ पर्यावरण जैसी बुनियादी जरूरतों तक पहुंच से है। उन्होंने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संस्थाओं की जवाबदेही और उनकी सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि मानवाधिकार आयोगों को केवल शिकायतों के निपटारे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ऐसी कमियों की पहचान भी करनी चाहिए जो लोगों के अधिकारों के उल्लंघन की वजह बनती हैं। इससे समस्याओं के समाधान के लिए व्यापक और संस्थागत स्तर पर कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

NHRC ने 33 वर्षों में 24 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए

मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कामकाज की सराहना करते हुए बताया कि पिछले 33 वर्षों में आयोग ने 24 लाख से अधिक मामलों का पंजीकरण किया है। इनमें से 23 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया गया है और आयोग की ओर से 98 प्रतिशत से अधिक निपटारा दर का उल्लेख किया गया।

कार्यक्रम में ‘NHRC India’ मोबाइल ऐप का भी जिक्र किया गया। इस ऐप का उद्देश्य नागरिकों के लिए मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी शिकायत दर्ज करने और उनकी स्थिति को ट्रैक करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

कमजोर और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों पर जोर

CJI सूर्यकांत ने मानवाधिकार आयोग को संविधान में किए गए वादों का संरक्षक बताते हुए कहा कि इसकी भूमिका उन लोगों तक पहुंचने में अहम है, जिन्हें अदालतों तक पहुंचने में मुश्किल होती है।

उन्होंने विचाराधीन कैदियों, प्रवासी मजदूरों, बुजुर्गों, दिव्यांगों, महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, मानवाधिकार आयोग उन लोगों की आवाज सुनने का माध्यम बन सकता है, जो अपनी समस्याएं प्रभावी ढंग से सामने नहीं रख पाते।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आयोग जरूरत पड़ने पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकता है। इस तरह मानवाधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक संस्थाओं और मानवाधिकार आयोगों की भूमिका एक-दूसरे की पूरक बन सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  12 October 2026, 1:13 PM IST