बॉलीवुड फिल्म ‘केरल स्टोरी 2’ मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मद्रास हाईकोर्ट का नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है। वे 6 मार्च, 2026 को अपना पदभार संभालेंगे। उनका करीब तीन दशकों से अधिक का कानूनी एवं न्यायिक अनुभव है।

मद्रास हाईकोर्ट को मिला नया चीफ जस्टिस
New Delhi: बॉलीवुड फिल्म 'केरल स्टोरी 2' मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को प्रमोशन दिया गया है। उन्हें मद्रास हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वे मद्रास हाईकोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव का दायित्व संभालेंगे। न्यायमूर्ति श्रीवास्तव 5 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। न्यायमूर्ति धर्माधिकारी एक दिन बाद 6 मार्च, 2026 को अपना पदभार संभालेंगे।
गौरतलब है कि हाल ही में न्यायमूर्ति धर्माधिकारी केरल उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों की खंडपीठ के सदस्य के रूप में 'द केरल स्टोरी 2 - गोज बियॉन्ड' की रिलीज से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुर्खियों में आए। न्यामूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी उस खंडपीठ का हिस्सा थे, जिसने फिल्म 'द केरल स्टोरी 2- गोज बियॉन्ड' की रिलीज पर रोक लगाने वाले एकल पीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई की थी।
जस्टिस धर्माधिकारी और जस्टिस पी.वी. बालकृष्णन की पीठ ने गुरुवार देर शाम करीब दो घंटे की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और सुनवाई के अंत में कोई अंतरिम निर्देश जारी नहीं किया।
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न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मद्रास उच्च न्यायालय के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में नामित करने की सिफारिश सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने की।
8 जुलाई, 1966 को रायपुर में जन्मे न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने नागपुर विश्वविद्यालय से वाणिज्य और कानून में डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने 1992 में जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया, जहां उन्होंने आयकर विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का प्रतिनिधित्व भी किया है।
अप्रैल 2016 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और मार्च 2018 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। पिछले साल अप्रैल में उन्होंने केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।
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तीन दशकों से अधिक के कानूनी एवं न्यायिक अनुभव के साथ न्यायमूर्ति धर्माधिकारी अब एक ऐसे हाई कोर्ट की अध्यक्षता करने जा रहे हैं जो व्यापक और विविध प्रकार के मामलों का निपटारा करता है। उनके कार्यकाल में तमिलनाडु के कानूनी परिदृश्य में महत्वपूर्ण निर्णयों का स्वरूप तय होने की उम्मीदें व्यक्त की जा रही हैं।