दिल्ली में इंटरनेट बंदी पर सुप्रीम कोर्ट में घिरे गृह सचिव, अवमानना नोटिस पर दिया जवाब

विरोध-प्रदर्शन के दौरान लगाई गई पाबंदियों और मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद करने को लेकर केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट के अवमानना नोटिस के जवाब में बिना शर्त माफी मांगी है।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 15 October 2026, 10:40 AM IST
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नई दिल्ली: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान लगाई गई पाबंदियों और मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद करने को लेकर केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट के अवमानना नोटिस के जवाब में बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर को अदालत की ओर से दिए गए आदेश का उल्लंघन जानबूझकर नहीं किया गया था।

अपने जवाब में मोहन ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियों का उद्देश्य शांति बनाए रखना और कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकना था। उन्होंने अदालत से अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस रद्द करने का अनुरोध भी किया है।

पाबंदियां लगाने के पीछे क्या थी वजह?

गृह सचिव ने अपने जवाब में एक प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन का हवाला दिया। उनके अनुसार, प्रदर्शन के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी और प्रशासन को कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी। इसी वजह से संबंधित पाबंदियां लगाई गई थीं।

उन्होंने 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस को मिले अनुभवों का भी उल्लेख किया। केंद्र सरकार का पक्ष है कि इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए थे।

हालांकि, पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन का सवाल इस मामले के केंद्र में बना हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को क्या आदेश दिया था?

सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर के अपने आदेश में केंद्र सरकार से कुछ सेवाओं पर लगाई गई पूर्ण पाबंदियों को हटाने और उनके नियमन को सीमित रखने को कहा था। अदालत का निर्देश था कि सेवाओं को इस तरह नियंत्रित किया जाए कि दिल्ली के आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो।

इसी आदेश के अनुपालन को लेकर उठे सवालों के बीच गृह सचिव को अवमानना नोटिस का जवाब देना पड़ा। मोहन ने अपने जवाब में कहा कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था।

रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में बंद रहा मोबाइल इंटरनेट

मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने के मुद्दे पर गृह सचिव ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद करने का अनुरोध किया था। उनके मुताबिक, इस अनुरोध पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की गई और तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए इसे उचित माना गया।

मोहन ने स्पष्ट किया कि रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रही थीं। यह पाबंदी मोबाइल इंटरनेट तक सीमित थी। वाई-फाई और ब्रॉडबैंड सेवाओं को इससे बाहर रखा गया था।

अवमानना नोटिस रद्द करने और आदेश में बदलाव की मांग

गृह सचिव ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने अदालत के 11 अक्टूबर के आदेश में बदलाव का अनुरोध किया है।

उनका आग्रह है कि कानूनी सुरक्षा उपायों के दायरे में रहते हुए जरूरत पड़ने पर इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने की अनुमति दी जाए। इस अनुरोध पर अदालत का रुख मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

मामले में प्रमुख सवाल यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियां अदालत के निर्देशों और लागू कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप थीं या नहीं। गृह सचिव की माफी और उनके अनुरोध पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

Location :  New Delhi

Published :  15 October 2026, 10:40 AM IST

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