Hindi Journalism Day: उदन्त मार्तण्ड से AI न्यूज़रूम तक…पहले सच की लड़ाई, अब स्पीड की होड़…199 साल में कितनी बदल गई पत्रकारिता?

30 मई ये वह तारीख है जिसने हिंदी पत्रकारिता को पहचान दी। मगर ऐसे में सवाल यह है क्या आज की पत्रकारिता वैसी ही है जैसी उस दौर में थी या खबरों की दुनिया पूरी तरह बदल गई है? आइए जानते पहले किस तरह पत्रकारिता लोगों की आवाज बनते थे।

Post Published By: Subhash Raturi
Updated : 30 May 2026, 5:16 PM IST

New Delhi:  30 मई ये वह तारीख है  जिसने हिंदी पत्रकारिता को पहचान दी। साल 1826 मे आज के ही दिन हिंदी का पहला समाचार पत्र उदन्त मार्तण्य प्रकाशित हुआ था। लगभग दो शताब्दी बाद सवाय यह है कि क्या आज की पत्रकारिता वैसी ही है जैसी उस दौर में थी या खबरों की दुनिया पूरी तरह बदल गई है?

मिशन थी पत्रकारिता, अब बन गई  रियल टाइम’ दौड़?

जब 18 26 में उदन्त मार्तण्य शुरू हुआ था तब पत्रकारिता सिर्फ खबर देने का माध्यम नहीं बल्कि समाज को जागरूक करने का मिशन मानी जाती थी। कम संसाधन, कम पाठक और आर्थिक संघर्ष के बावजूद पत्रकार सच  और समाज की आवाज बनते थे।

वहीं आज की पत्रकारिता की बात करे तो डिडिटल युग में प्रवेश कर चुकी है।  अगले दिन खबरे अखबार में नहीं बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर पहुंच जाती हैं।  पहले छपती  थी अब ट्रेंड करती है।

उस दौर की पत्रकारिता बनाम आज की पत्रकारिता

पहले पत्रकार के  सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता संसाधनों की कमी और पहुंच  का अभाव था  खबर जुटाने में कई दिन लग जाते थे। उस समय न कैमरा था, न सोशल मीडिया और न ही AI  पर आज तस्वीर बिल्कुल उलट है। पत्रकार के हाथ में स्मार्टफोन है लाइव स्ट्रीमिंग है डेटा एनालिटिक्स है और अब तो AI आधारित न्यूजरूम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन तनकनीक के इस विस्तार के साथ एक नई  चुनौती भी आई है  फेक न्यूज, क्लिकबेट और स्पीड का दबाव।

क्या आज खबरें तेज हुई हैं, लेकिन गहराई कम हुई है?

दरअसल,  आज सूचना पहले से ज्यादा मिल रही है लेकिन उसके साथ वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई। पहले खबर प्रकाशित होने से पहले लंबी संपादकीट प्रकिया से गुजरती थी। अब कई प्लेटफॉम पर सबसे पहले दिखाने की होड़ लगी है। ऐसे में तथ्य जांच का समय कम मिल पाता है। यही वजह है कि आज के पत्रकारिता में विश्वसनीयता सबसे बड़ा सवाल बनती  जा रही है।

सोशल मीडिया ने पत्रकारिता को मजबूत किया या चुनौती दी?

सोशल मीडिया ने आम लोगों को भी रिपोर्टर बनने का मौका दिया है। कोई भी घटना कुछ मिनटों में वायरल हो सकती है। लेकिन इसी के साथ अधूरी जानकारी, भ्रामक दावे और बिना पुष्टि वाली खबरों का खतरा भी बढ़ा है।

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ऐसे में पत्रकारिता की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है- सिर्फ खबर देना नहीं, बल्कि सही और गलत के बीच फर्क साफ करना।

199 साल बाद सबसे बड़ा सवाल

हिंदी पत्रकारिता दिवस सिर्फ इतिहास याद करने का दिन नहीं है। यह खुद से पूछने का मौका भी है कि क्या आज की पत्रकारिता अपनी मूल भावना- सच, जनहित और जवाबदेही- को बचाए हुए है? ‘उदन्त मार्तण्ड’ से शुरू हुआ सफर अब डिजिटल, वीडियो, पॉडकास्ट और AI तक पहुंच चुका है। तकनीक बदली है, प्लेटफॉर्म बदले हैं, लेकिन पत्रकारिता की असली ताकत आज भी वही है- विश्वास

Location :  New Delhi

Published :  30 May 2026, 3:44 PM IST