गुजरात में भी UCC को राष्ट्रपति की मंजूरी, जानिये राज्य में क्या बदल जाएगा?

गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। खास बात यह है कि कानून में बहुविवाह पर रोक, विवाह और लिव-इन के रजिस्ट्रेशन समेत कई प्रावधान किए गए हैं। आखिर आम लोगों की जिंदगी में कितना बदलाव आएगा?

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 2 October 2026, 3:31 PM IST

Ahmedabad: गुजरात में समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही गुजरात में इस कानून को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। विधानसभा ने मार्च 2026 में गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित किया था। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

बता दें कि गुजरात अब उत्तराखंड के बाद दूसरा राज्य हो गया है जहां पर यूनिफॉर्म सिविल कोड प्रभावी हुआ है। देश में सबसे पहले उत्तराखंड में UCC लागू हुआ।

गुजरात में UCC को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी

गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को लंबे मंथन और सात घंटे से ज्यादा चली चर्चा के बाद UCC बिल पारित किया था। इसके बाद विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। अब राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के साथ इसकी कानूनी प्रक्रिया का अहम चरण पूरा हो गया है।

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शादी के नियमों में क्या बदलेगा?

गुजरात UCC के तहत अलग-अलग धर्मों के लिए विवाह से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानूनी ढांचा लागू होगा। विवाह का पंजीकरण जरूरी होगा और इसके लिए तय समयसीमा का पालन करना होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, विवाह का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों के भीतर कराने का प्रावधान है। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।

इसके अलावा बहुविवाह यानी एक से ज्यादा शादी पर रोक होगी। अगर किसी व्यक्ति का जीवनसाथी जीवित है तो वह दूसरी शादी नहीं कर सकेगा। जबरन, धोखे या दबाव में कराई गई शादी के लिए भी सजा का प्रावधान किया गया है।

लिव-इन रिलेशनशिप भी कानून के दायरे में

गुजरात UCC का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ा है। कानून के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसके लिए संबंधित रजिस्ट्रार के पास निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी देनी होगी। पंजीकरण नहीं कराने पर जुर्माना या सजा का प्रावधान है। लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा होने वाले बच्चों के अधिकारों और महिला के भरण-पोषण से जुड़े प्रावधान भी कानून के दायरे में रखे गए हैं। यानी निजी रिश्तों से जुड़े कई मामलों में अब कानूनी प्रक्रिया की भूमिका बढ़ेगी।

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बेटियों के संपत्ति अधिकार भी होंगे समान

UCC में उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों के लिए भी समान नियम तय किए गए हैं। इसमें बेटियों और बेटों के लिए समान उत्तराधिकार अधिकार देने का प्रावधान है। विवाह, तलाक, गोद लेने और विरासत जैसे मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग नियमों की जगह एक समान व्यवस्था बनाने की कोशिश की गई है।

गुजरात UCC में अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इसका उद्देश्य उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों और संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकारों को बनाए रखना बताया गया है।

Location :  Ahmedabad

Published :  2 October 2026, 3:12 PM IST