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रेगिस्तान फोटो सोर्स- Google
New Delhi: दिन में तपती रेत और रात होते ही ठंडी हवाएं… रेगिस्तान का मौसम अक्सर लोगों को हैरान कर देता है। एक ही जगह पर कुछ घंटों के अंतर में तापमान में इतना बड़ा बदलाव कैसे आ जाता है? आखिर जिस रेत पर दिन में पैर रखना मुश्किल हो जाता है, वही रात में इतनी ठंडी कैसे पड़ जाती है? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि सूर्य की ऊर्जा, हवा में नमी की कमी और धरती की गर्मी बाहर निकलने की प्रक्रिया का विज्ञान है।
दिन में रेगिस्तान क्यों बन जाता है आग का गोला?
रेगिस्तान में दिन के समय तापमान बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है सूर्य की तेज किरणें और वातावरण में नमी की कमी। जब सूरज की किरणें धरती तक पहुंचती हैं, तो जमीन उनकी ऊर्जा को अवशोषित करके गर्म होने लगती है। रेगिस्तानी इलाकों में आसमान अक्सर साफ रहता है और बादल कम होते हैं। ऐसे में सूर्य की किरणों को रोकने वाली बादलों की परत मौजूद नहीं होती और जमीन को पर्याप्त मात्रा में सौर ऊर्जा मिलती है।
रेत की एक खासियत यह भी है कि उसकी ऊपरी सतह सूरज की ऊर्जा को तेजी से अवशोषित करके गर्म हो सकती है। यही कारण है कि दोपहर के समय रेत का तापमान आसपास की हवा के तापमान से भी काफी ज्यादा हो सकता है। हालांकि, रेत की ऊपरी परत जल्दी गर्म होती है, लेकिन यह गर्मी जमीन के भीतर बहुत गहराई तक नहीं पहुंचती।
रेगिस्तान में वनस्पति कम होने के कारण छाया भी कम मिलती है। इसके अलावा, मिट्टी में पानी की कमी होने से वाष्पीकरण के जरिए ठंडक पैदा करने वाली प्रक्रिया सीमित रहती है। नतीजतन, सूर्य की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा जमीन और उसके आसपास की हवा को गर्म करने में लग सकता है।
सूरज ढलते ही क्यों बदल जाता है मौसम?
दिनभर गर्म रहने वाला रेगिस्तान सूर्यास्त के बाद तेजी से ठंडा होने लगता है। इसकी सबसे अहम वजह है धरती से निकलने वाली ऊष्मा। दिन में जमीन सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करती है, लेकिन रात में सूर्य की ऊर्जा मिलनी बंद हो जाती है। इसके बाद जमीन अपनी संचित गर्मी को अवरक्त विकिरण यानी इन्फ्रारेड रेडिएशन के रूप में वातावरण और अंतरिक्ष की ओर छोड़ने लगती है।
रेगिस्तानी इलाकों में हवा में जलवाष्प कम होती है। सामान्य परिस्थितियों में जलवाष्प और बादल धरती से निकलने वाली ऊष्मा के कुछ हिस्से को अवशोषित करके दोबारा नीचे की ओर विकिरित करते हैं। इससे सतह को रात में कुछ गर्माहट मिलती रहती है। लेकिन शुष्क रेगिस्तानी वातावरण में यह प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर हो सकता है।
इसके अलावा, साफ आसमान में बादलों की कमी के कारण धरती से निकलने वाली ऊष्मा अंतरिक्ष की ओर अधिक प्रभावी ढंग से निकल पाती है। जमीन की सतह ठंडी होती है और उसके संपर्क में आने वाली हवा भी ठंडी होने लगती है। यही वजह है कि सूर्यास्त के कुछ घंटों बाद तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा सकती है।
क्या सिर्फ रेत ही है तापमान में बदलाव की वजह?
नहीं, रेगिस्तान में दिन और रात के तापमान का अंतर केवल रेत के कारण नहीं होता। इसके पीछे कई प्राकृतिक कारक एक साथ काम करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है हवा में नमी की कमी, साफ आसमान, बादलों का अभाव और सतह की ऊष्मा को जमा करने तथा छोड़ने की क्षमता।
पानी की तुलना में सूखी रेत की ऊष्मा धारिता सामान्यतः कम होती है। इसका मतलब है कि रेत के तापमान में बदलाव लाने के लिए अपेक्षाकृत कम ऊर्जा की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, यह बदलाव रेत के प्रकार, उसकी नमी, हवा की गति और जमीन की संरचना पर भी निर्भर करता है।
इसके विपरीत, समुद्र के आसपास के क्षेत्रों में पानी बड़ी मात्रा में ऊष्मा अवशोषित कर सकता है और उसे धीरे-धीरे छोड़ता है। समुद्र से आने वाली नम हवा और बादलों की मौजूदगी भी तापमान में अचानक बदलाव को सीमित कर सकती है। इसलिए तटीय इलाकों में दिन और रात के तापमान का अंतर अक्सर रेगिस्तानी क्षेत्रों की तुलना में कम होता है।
क्या रेगिस्तान की हर रात बेहद ठंडी होती है?
ऐसा जरूरी नहीं है। रेगिस्तान में रात का तापमान मौसम, भौगोलिक स्थिति, ऊंचाई, हवा और बादलों पर निर्भर करता है। सर्दियों में कई रेगिस्तानी इलाकों में रात का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे नीचे भी पहुंच सकता है। दूसरी ओर, गर्मियों में दिनभर अत्यधिक गर्म रहने वाले रेगिस्तान की रातें भी काफी गर्म रह सकती हैं।
अगर रात में बादल छाए हों, हवा में नमी अधिक हो या तेज हवाएं चल रही हों, तो जमीन के ठंडा होने की प्रक्रिया बदल सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर रेगिस्तान में दिन बेहद गर्म और हर रात बेहद ठंडी होती है।
रेगिस्तान के मौसम का यह अंतर हमें बताता है कि पृथ्वी का तापमान सिर्फ सूरज की गर्मी से तय नहीं होता। हवा में मौजूद नमी, बादलों की परत, जमीन की प्रकृति और ऊष्मा के आदान-प्रदान की प्रक्रिया भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। यही विज्ञान रेगिस्तान को दिन में तपता हुआ और रात में ठंडा बना सकता है।
Location : New Delhi
Published : 24 October 2026, 2:55 PM IST
Topics : Climate Desert science facts
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