श्रावणी मेले से पहले देवघर में दिन-रात काम, क्या डेडलाइन पर खरा उतरेगा प्रशासन?

जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और तमाम विभागों की गतिविधियां इस समय चरम पर हैं। सड़क से लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था, बिजली से लेकर सुरक्षा और कांवड़िया पथ से लेकर मंदिर क्षेत्र तक हर जगह अधिकारी दौड़ते नजर आ रहे हैं।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 25 July 2026, 3:03 AM IST

Deoghar: विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 की शुरुआत में अब गिनती के दिन शेष हैं। सरकार ने 25 जुलाई तक अधिकांश तैयारियां पूरी करने का लक्ष्य तय किया था। अब जब यह डेडलाइन सामने खड़ी है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन अपने तय समय पर खरा उतर पाएगा, या फिर कुछ व्यवस्थाएं अंतिम समय तक अधूरी ही रहेंगी?

जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और तमाम विभागों की गतिविधियां इस समय चरम पर हैं। सड़क से लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था, बिजली से लेकर सुरक्षा और कांवड़िया पथ से लेकर मंदिर क्षेत्र तक हर जगह अधिकारी दौड़ते नजर आ रहे हैं। मशीनें चल रही हैं, मजदूर काम में जुटे हैं और अधिकारी लगातार निरीक्षण कर रहे हैं।

कांवड़िया पथ पर तेज हुआ काम

झारखंड में प्रवेश करने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए कांवड़िया पथ पर तेजी से कार्य कराया जा रहा है। कई स्थानों पर पैदल चलने वाले मार्ग पर बालू बिछाई जा रही है, ताकि बारिश के बीच फिसलन कम हो और श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।

जहां-जहां मरम्मत की जरूरत थी वहां सड़क सुधार, बैरिकेडिंग और प्रकाश व्यवस्था पर भी तेजी से काम चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि मेला शुरू होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी।

हर विभाग अलर्ट मोड में

इस बार सिर्फ जिला प्रशासन ही नहीं, बल्कि लगभग सभी विभाग युद्धस्तर पर काम करते दिखाई दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों, मेडिकल कैंपों और एंबुलेंस व्यवस्था को अंतिम रूप दे रहा है।ऊर्जा विभाग निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा है।

पहली बार एआई करेगा भीड़ की निगरानी

आरपीएफ के आईजी सिन्हा ने जानकारी दी है कि मेला क्षेत्र और रेलवे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन के लिए एआई आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। अगर यह तकनीक प्रभावी साबित होती है तो भीड़ नियंत्रण में काफी मदद मिल सकती है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि एआई केवल एक सहायक तकनीक है, उसका सफल होना पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि कैमरे, नेटवर्क, कंट्रोल रूम और मौके पर मौजूद सुरक्षा बल कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं।यानी तकनीक जितनी महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक जरूरी है मानवीय सतर्कता और त्वरित निर्णय।

कांवड़ियों की जुबान पर एक ही सवाल

उधर बिहार की सीमा से झारखंड में प्रवेश कर रहे कई कांवड़ियों के बीच एक अलग चर्चा भी सुनाई दे रही है। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि पिछले वर्ष जो सुविधाएं रास्ते में उपलब्ध थीं, इस बार उनमें कुछ स्थानों पर कमी महसूस हो रही है।

हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएंगी, लेकिन श्रद्धालुओं की अपेक्षा है कि मेला शुरू होने से पहले उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

डेडलाइन की असली परीक्षा

25 जुलाई प्रशासन के लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उसकी तैयारियों की असली परीक्षा है। कागजों में योजनाएं बनाना आसान होता है, लेकिन लाखों श्रद्धालुओं के सामने उन योजनाओं को जमीन पर उतारना सबसे बड़ी चुनौती होती है।अगर तय समय पर सभी व्यवस्थाएं पूरी हो जाती हैं तो यह प्रशासनिक सफलता मानी जाएगी। लेकिन यदि कहीं भी लापरवाही रह गई तो उसका सीधा असर लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा पर पड़ सकता है।

अब सबकी निगाहें 25 जुलाई की डेडलाइन पर टिकी हैं। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि इस बार प्रशासन अपने दावों पर कितना खरा उतरता है और क्या श्रद्धालुओं को वास्तव में पहले से बेहतर, सुरक्षित और सुगम श्रावणी मेला मिल पाएगा।

Location :  Deoghar

Published :  25 July 2026, 3:01 AM IST