देवघर से छूटी सेहत की ‘एक्सप्रेस’, दावों और हकीकत के बीच फंसा पीढ़ियों का वो दर्द… क्या सच में बदलेगी तस्वीर?

देवघर सदर अस्पताल से सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ निःशुल्क जांच और जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। इस आनुवंशिक रक्त विकार से निपटने के लिए सिविल सर्जन ने टीमों को रवाना किया। हालांकि, सटीक आंकड़ों की कमी और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना अब भी जिले के लिए बड़ी चुनौती है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 20 June 2026, 11:52 AM IST

Deoghar: झारखंड की स्वास्थ्य राजधानी कहे जाने वाले देवघर जिले के सदर अस्पताल से सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ एक बड़ी और उम्मीदों भरी मुहिम का आगाज हुआ है। अस्पताल परिसर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जन ने हरी झंडी दिखाकर स्वास्थ्यकर्मियों की टीमों को रवाना किया। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इस गंभीर आनुवंशिक बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना, समय रहते इसकी पहचान करना और निःशुल्क जांच शिविरों के माध्यम से मरीजों को ढूंढ निकालना है। लेकिन इस चमकते अभियान के पीछे कुछ ऐसे सुलगते सवाल भी हैं, जो व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करते हैं।

पीढ़ियों को खोखला कर रहा है यह आनुवंशिक 'काल'

सिकल सेल एनीमिया कोई सामान्य बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ट्रांसफर होने वाला बेहद खतरनाक रक्त विकार है। इस बीमारी में शरीर के भीतर मौजूद लाल रक्त कणिकाएं (RBC) अपना सामान्य गोल आकार खोकर हंसिया (सिकल) जैसी टेढ़ी हो जाती हैं। इसके कारण नसों में खून का बहाव रुकने लगता है और अंगों तक ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है। मरीज को असहनीय दर्द, भयंकर एनीमिया (खून की कमी) का सामना करना पड़ता है और अंगों के डैमेज होने के कारण समय से पहले जान जाने का खतरा भी बढ़ जाता है।

झारखंड में दावों के बीच 'लापता' हैं असली आंकड़े

इस अभियान के बीच सबसे बड़ा सस्पेंस और चुनौती आंकड़ों को लेकर है। खुद राज्य सरकार इस बात को स्वीकार कर चुकी है कि झारखंड में लंबे समय तक सिकल सेल के जिलावार सटीक आंकड़ों का भारी अभाव रहा है। जब विभाग को बीमारी के वास्तविक बोझ और मरीजों की सही संख्या का ही पता नहीं होगा, तो इलाज की योजनाएं कैसे सफल होंगी? हालांकि, राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के तहत देश भर में अब तक 6.83 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें 2.38 lakh लोग पीड़ित और 19 lakh से ज्यादा लोग इस बीमारी के वाहक (कैरियर) पाए गए हैं।

क्या केवल बैठकों और कागजों तक सीमित रह जाएगी मुहिम?

विशेषज्ञों का मानना है कि देवघर में रैली, बैनर और हरी झंडी दिखाना तो आसान है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब सुदूर गांवों तक स्क्रीनिंग पहुंचेगी। इस बीमारी की सटीक पहचान के लिए HPLC जैसी उन्नत जांच तकनीक और प्रशिक्षित डॉक्टरों की जरूरत होती है, जिसकी कमी अक्सर सरकारी सिस्टम में खलती है। देवघर पर इसलिए भी बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि यहां श्रावणी मेला नजदीक है और देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु बाबा नगरी आने वाले हैं। ऐसे में देखना होगा कि क्या यह मुहिम जमीन पर उतरकर पीढ़ियों का दर्द मिटा पाएगी, या फिर अन्य सरकारी योजनाओं की तरह सिर्फ फाइलों और बैठकों में सिमटकर रह जाएगी।

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शादी से पहले 'हेल्थ कुंडली' मिलाने की जरूरत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सिकल सेल को जड़ से खत्म करने के लिए शादी से पहले युवक-युवती के ब्लड ग्रुप और सिकल सेल कार्ड (कैरियर स्टेटस) का मिलान करना बेहद जरूरी है। यदि दो सिकल सेल वाहक (कैरियर) आपस में शादी करते हैं, तो उनके बच्चे को यह खतरनाक बीमारी होना लगभग तय होता है। स्वास्थ्य विभाग अब ग्रामीण स्तर पर पुरोहितों और स्थानीय विवाह संगठनों से भी इस मुहिम से जुड़ने की अपील करने की योजना बना रहा है।

Location :  Deoghar

Published :  20 June 2026, 11:52 AM IST