
देवघर में शातिर अपराधी गिरफ्तार
मंगलवार को पुलिस ने तीन और कथित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि ये लोग फ्लिपकार्ट, अमेजन, फोनपे, एयरटेल पेमेंट बैंक और सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे। मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं। लेकिन इस कार्रवाई के बाद एक सवाल फिर खड़ा हो गया है - क्या गिरफ्तारी भर से साइबर अपराध पर लगाम लग रही है?
देवघर पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। बीते महीनों में कई अभियानों में 4, 8, 10, 13 तक साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हैं। अप्रैल 2026 में 10, दिसंबर 2025 में 13 और नवंबर 2025 में 8 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी दर्ज की गई थी।
सवाल यह है कि जब इतनी गिरफ्तारियां हो रही हैं तो आखिर नए चेहरे कहां से आ रहे हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस एक गिरोह पकड़ती है, लेकिन कुछ दिनों बाद दूसरा गिरोह उसी तरीके से सक्रिय हो जाता है। यानी बीमारी का इलाज हो रहा है, लेकिन संक्रमण खत्म नहीं हो रहा।
कभी जामताड़ा का नाम साइबर अपराध के लिए बदनाम था। लेकिन अब देवघर के कई ग्रामीण इलाकों का नाम भी लगातार साइबर ठगी के मामलों में सामने आने लगा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि स्मार्टफोन, सस्ते इंटरनेट और बेरोजगारी का खतरनाक मिश्रण कुछ युवाओं को आसान कमाई की तरफ धकेल रहा है। दुखद यह है कि जिन हाथों में रोजगार होना चाहिए, वे फर्जी कस्टमर केयर नंबर अपलोड करने और लोगों की मेहनत की कमाई उड़ाने में इस्तेमाल हो रहे हैं।
पुलिस जांच में बार-बार एक जैसी बातें सामने आती हैं। कभी फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी, कभी बैंक अधिकारी, कभी कैशबैक का लालच, तो कभी पीएम किसान योजना या लोन दिलाने का झांसा।
फॉर्मूला पुराना है, लेकिन शिकार हर दिन नए मिल रहे हैं। यही वजह है कि साइबर अपराधियों का मनोबल पूरी तरह टूटता नहीं दिख रहा।
इस सवाल का जवाब सीधा "हां" या "नहीं" में नहीं दिया जा सकता।सकारात्मक पक्ष यह है कि देवघर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। साइबर थाना सक्रिय है। गिरफ्तारियां हो रही हैं। बरामदगी हो रही है। कई राज्यों तक फैले नेटवर्क का खुलासा भी हुआ है। लेकिन नकारात्मक पक्ष भी उतना ही गंभीर है। यदि हर महीने नए साइबर अपराधी पकड़े जा रहे हैं, तो इसका मतलब यह भी है कि जड़ें अभी भी जमीन के भीतर मौजूद हैं।सवाल कार्रवाई का नहीं, परिणाम का है।
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स्थानीय स्तर पर चर्चा होती है कि कुछ इलाकों में साइबर अपराध अब व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि "सिस्टम" का रूप लेता जा रहा है। कुछ युवा इसे नौकरी का विकल्प समझ बैठे हैं। कई मामलों में देखा गया है कि एक व्यक्ति पकड़ा जाता है तो उसके संपर्क में दर्जनों और लोग निकल आते हैं। यानी चुनौती सिर्फ अपराधियों को पकड़ने की नहीं, बल्कि उस मानसिकता को बदलने की है जो ठगी को कमाई का साधन मान बैठी है।
सिर्फ गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी। गांव स्तर पर साइबर जागरूकता अभियान। युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास और स्कूल-कॉलेजों में डिजिटल नैतिकता की शिक्षा। बार-बार अपराध करने वालों की संपत्ति की जांच एवं पंचायत स्तर तक साइबर निगरानी तंत्र। इन उपायों के बिना गिरफ्तारी का आंकड़ा बढ़ेगा, लेकिन समस्या वहीं की वहीं रह सकती है। तीन साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी पुलिस की सफलता है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन असली सवाल गिरफ्तारी नहीं, भविष्य है। बाबा की नगरी आखिर कब तक साइबर ठगी की खबरों से सुर्खियां बटोरती रहेगी? देवघर को धार्मिक राजधानी के रूप में पहचान मिलेगी या साइबर अपराध के नए गढ़ के रूप में? यह सवाल सिर्फ पुलिस के सामने नहीं, बल्कि पूरे समाज के सामने खड़ा है।
Location : Deoghar
Published : 2 June 2026, 7:30 PM IST