देवघर में सप्तमी पर निभाई गई सदियों पुरानी परंपरा, शिवगंगा तट पर मां दुर्गा का महास्नान

देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में सप्तमी पर सदियों पुरानी परंपरा निभाई गई। मां दुर्गा को डोली में शिवगंगा तट ले जाकर महास्नान कराया गया। इसके बाद भीतरखंड दुर्गा मंडप में पूजा-विधि पूरी कर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पट खोल दिए गए।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 October 2026, 7:34 PM IST

Deoghar: झारखंड की धार्मिक नगरी देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में शारदीय नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा की आराधना विशेष श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान के साथ की जा रही है। सप्तमी तिथि पर बाबा मंदिर परिसर स्थित भीतरखंड दुर्गा मंडप में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस दौरान मां दुर्गा को डोली में विराजमान कर शिवगंगा तट तक ले जाया गया, जहां परंपरा के अनुसार उनका महास्नान कराया गया। पूजा की निर्धारित विधियां पूरी होने के बाद मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के सामने मंडप का पट खोल दिया गया।

बेल वृक्ष के नीचे से शुरू हुआ सप्तमी का अनुष्ठान

बाबा बैद्यनाथ धाम में सप्तमी पूजा की शुरुआत बेल वृक्ष के नीचे से हुई। इसके बाद मां दुर्गा को डोली में विराजमान कराया गया और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ शिवगंगा तालाब के तट तक ले जाया गया। यहां पुजारी सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा और आचार्य श्रीनाथ महाराज की उपस्थिति में पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। इस दौरान परंपरा से जुड़ी विधियों का पालन किया गया।

सात सागर, सात नदियों और सात झरनों के जल से महास्नान

सप्तमी के अनुष्ठान में मां दुर्गा का महास्नान विशेष महत्व रखता है। परंपरा के अनुसार, इस दौरान मां को सात सागर, सात नदियों, सात झरनों और ओलावृष्टि के जल से स्नान कराने की विधि निभाई गई। धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी इस परंपरा को बाबा बैद्यनाथ धाम की विशिष्ट पूजा पद्धति का हिस्सा माना जाता है। महास्नान के दौरान पुरोहितों ने निर्धारित विधि-विधान के अनुसार अनुष्ठान संपन्न कराया। इसके बाद मां दुर्गा को दोबारा डोली में विराजमान किया गया।

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मंदिर की परिक्रमा के बाद भीतरखंड दुर्गा मंडप पहुंचीं मां

शिवगंगा तट पर महास्नान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मां दुर्गा की डोली को बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में लाया गया। इस दौरान मंदिर की परिक्रमा कराते हुए मां को भीतरखंड दुर्गा मंडप तक पहुंचाया गया। मंडप में प्राण-प्रतिष्ठा सहित निर्धारित धार्मिक विधियां संपन्न कराई गईं। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हुई। अनुष्ठान पूरा होने पर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मां का पट खोल दिया गया। इसके साथ ही भक्तों के दर्शन और पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया।

पीढ़ियों से निभाई जा रही है परंपरा

बाबा बैद्यनाथ धाम में नवरात्र के दौरान होने वाले अनुष्ठान यहां की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सप्तमी पर डोली यात्रा, शिवगंगा तट पर महास्नान और भीतरखंड दुर्गा मंडप में पूजा की परंपरा लंबे समय से निभाई जा रही है। पुरोहित भक्तिनाथ फलाहारी के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत सरदार पंडा भवप्रीत नंद ओझा ने की थी। आज भी इसका निर्वहन उसी श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ किया जा रहा है। यह परंपरा बाबा धाम की ऐतिहासिक धार्मिक मान्यताओं और पीढ़ियों से चली आ रही पूजा पद्धति को संरक्षित रखने का प्रतीक है।

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सप्तमी पूजा के साथ निशा पूजा का भी महत्व

पुरोहित भक्तिनाथ फलाहारी ने बताया कि सप्तमी तिथि पर मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि अगले दिन सप्तमी तिथि की पूजा के साथ निशा पूजा का अनुष्ठान भी संपन्न कराया जाएगा। नवरात्र के दौरान निशा पूजा को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है। बाबा मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले अनुष्ठानों में परंपरागत विधियों और निर्धारित पूजा-विधान का पालन किया जाता है। ऐसे अवसरों पर श्रद्धालुओं के लिए मां के दर्शन और आराधना का विशेष महत्व रहता है।

शिव की नगरी में शिव और शक्ति की आराधना

बाबा बैद्यनाथ धाम देशभर में भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। हालांकि, यहां की धार्मिक पहचान केवल शिवोपासना तक सीमित नहीं है। मां दुर्गा की आराधना और नवरात्र के पारंपरिक अनुष्ठान भी इस धाम की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं। सप्तमी पर डोली यात्रा, शिवगंगा तट पर महास्नान और भीतरखंड दुर्गा मंडप में विधिवत पूजा के माध्यम से इस परंपरा का निर्वहन किया गया। इस आयोजन ने बाबा धाम में शिव और शक्ति की उपासना के गहरे संबंध को भी उजागर किया। मां दुर्गा के दर्शन के लिए पट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अवसर मिला।

Location :  Deoghar

Published :  17 October 2026, 7:34 PM IST