कनॉट प्लेस से जंतर-मंतर तक के मामले में नया मोड़, जानें अब अगला कदम क्या होगा?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रंका की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर की घटनाओं से जुड़े दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है।

Updated : 21 October 2026, 2:24 PM IST

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रंका की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर की घटनाओं से जुड़े दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। इनमें एक मामला कनॉट प्लेस इलाके में कथित तौर पर प्रवेश करने और दूसरा प्रतिबंधित जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित रूप से घुसने से जुड़ा है। उधर, दोनों नेताओं ने अपनी हिरासत और न्यायिक अभिरक्षा को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया गया और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है।

कनॉट प्लेस से जंतर-मंतर तक, दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच के पास

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रंका से जुड़े दोनों मामले 13 अक्टूबर को दर्ज किए गए थे। इनमें से कनॉट प्लेस से संबंधित मामले को पहले क्राइम ब्रांच के हवाले किया गया था। अब जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित तौर पर प्रवेश से जुड़े दूसरे मामले की जांच भी क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।

इस घटनाक्रम के बाद दोनों नेताओं से जुड़े मामलों की जांच एक ही विशेष जांच इकाई के पास पहुंच गई है। हालांकि, जांच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने का मतलब अपने आप में यह नहीं है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत, फिर दो दिन का विस्तार

सौरव दास और आशुतोष रंका को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद 19 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह अवधि बुधवार, 21 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। दोनों नेता फिलहाल तिहाड़ जेल में अलग-अलग सेल में बंद हैं।

हिरासत बढ़ाए जाने के फैसले ने मामले को नया कानूनी मोड़ दे दिया है। दोनों नेताओं ने अपनी हिरासत और उसके बाद की न्यायिक अभिरक्षा को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।

'राजनीतिक खेल के कारण स्वतंत्रता नहीं छीनी जानी चाहिए'

CJP के दोनों नेताओं ने अपनी याचिका में दलील दी है कि आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया गया। उन्होंने हिरासत बढ़ाने के फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बताया है।

मंगलवार को तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए हाई कोर्ट पहुंचे दोनों नेताओं की ओर से यह भी कहा गया कि उनकी स्वतंत्रता को 'राजनीतिक खेल' के कारण प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए। याचिका में हिरासत की वैधता और रिहाई से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।

बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों नेताओं की याचिका पर तत्काल सुनवाई करने पर सहमति जताई। अब इस मामले में अदालत की सुनवाई और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

रिहाई हुई तो हाई कोर्ट की याचिका पर क्या पड़ेगा असर?

इस मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि यदि विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के स्तर पर दोनों नेताओं को रिहाई मिल जाती है, तो हाई कोर्ट में लंबित याचिका पर क्या असर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में याचिका के कुछ हिस्सों की प्रासंगिकता बदल सकती है। हालांकि, इसका अंतिम निर्धारण अदालत ही करेगी।

फिलहाल कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर से जुड़े दोनों मामले क्राइम ब्रांच की जांच के दायरे में हैं। दूसरी ओर, सौरव दास और आशुतोष रंका ने अपनी हिरासत को चुनौती देकर कानूनी लड़ाई तेज कर दी है। आने वाले समय में जांच की दिशा और हाई कोर्ट की सुनवाई इस मामले की आगे की तस्वीर साफ कर सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  21 October 2026, 2:24 PM IST