
CJI सूर्यकांत ने हाईकोर्ट की नई स्थायी बेंच का उद्घाटन किया (img: Dynamite news)
Leh/Ladakh: लद्दाख के लोगों के लिए 18 अक्टूबर 2026 का दिन न्यायिक सुविधाओं के लिहाज से अहम रहा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने लेह में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट की नई स्थायी बेंच का उद्घाटन किया। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में उच्च न्यायालय की सुनवाई के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। बेंच में नियमित सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होगी।
इस कदम से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें उच्च न्यायालय में अपने मामलों की सुनवाई के लिए श्रीनगर या जम्मू तक लंबी यात्रा करनी पड़ती थी। लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाकों, कठिन मौसम और लंबी दूरी के कारण न्यायिक संस्थानों तक पहुंचना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। नई बेंच इसी दूरी और उससे जुड़ी परेशानियों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
CJI सूर्यकांत के लेह दौरे के साथ सैनिकों तक न्यायिक सुविधाएं पहुंचाने से जुड़ा उनका पहले का संदेश भी चर्चा में है। उन्होंने मार्च 2026 में लेह में सैन्यकर्मियों को संबोधित करते हुए इस विचार पर जोर दिया था कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों और उनके परिवारों के लिए न्याय तक पहुंच आसान होनी चाहिए।
उन्होंने सैनिकों और उनके परिवारों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता की उपलब्धता पर भी जोर दिया था। अब लेह में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को क्षेत्र में न्यायिक पहुंच बढ़ाने की व्यापक पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, नई बेंच की स्थापना को सैनिकों से किए गए उसी वादे का प्रत्यक्ष परिणाम बताने के लिए आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
फीता काटकर शुभारंभ किया (img: Dynamite News)
नई बेंच में सुनवाई शुरू करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 21 अक्टूबर से लद्दाख से जुड़े मामलों की सुनवाई शुरू होगी। शुरुआत के लिए कुल 75 मामलों को सूचीबद्ध किया गया है।
इनमें पांच मामलों को 21 अक्टूबर को सुनवाई के लिए रखा गया है। बेंच में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति संजय परिहार की खंडपीठ के सुनवाई करने की जानकारी दी गई है।
यह व्यवस्था लद्दाख के वादियों, वकीलों और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। अब उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए दूसरे शहरों तक जाने की आवश्यकता कई मामलों में कम हो सकती है।
यह भी पढ़ें: Peace Bond क्या है? अभिजीत दिपके को 6 दिन बाद फिर क्यों साइन करना पड़ा मुचलका?
लद्दाख में उच्च न्यायालय की बेंच की मांग लंबे समय से उठती रही है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और उच्च न्यायालय तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए स्थानीय स्तर पर न्यायिक सुविधा विकसित करने की मांग की जाती रही।
लद्दाख में संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों के साथ न्यायिक सुविधाओं का विस्तार भी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहा है। सोनम वांगचुक सहित विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने क्षेत्र की समस्याओं और स्थानीय जरूरतों को उठाया है।
हालांकि, नई हाईकोर्ट बेंच को किसी एक व्यक्ति की मांग का प्रत्यक्ष परिणाम बताने के बजाय इसे लद्दाख में न्याय तक पहुंच आसान बनाने की लंबे समय से चली आ रही मांग और केंद्र सरकार के निर्णय के संदर्भ में देखना उचित होगा। बेंच की स्थापना से जुड़ा आधिकारिक विनियमन इस व्यवस्था का कानूनी आधार है।
यह भी पढ़ें: भारत-पाक सीमा पर अब डिजिटल पहरा, रात और कोहरे में भी होगी निगरानी
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने बेंच की स्थापना को क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। प्रशासन का कहना है कि इससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को उच्च न्यायालय तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी और लंबी यात्रा से जुड़ा समय तथा खर्च कम करने में मदद मिलेगी।
लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने भी कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, खराब मौसम और लंबी दूरी के कारण उच्च न्यायिक संस्थानों तक पहुंचना स्थानीय लोगों के लिए मुश्किल रहा है। नई बेंच इस चुनौती को कम करने की दिशा में अहम कदम है।
लेह में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना केवल एक नई न्यायिक इमारत या कार्यालय की शुरुआत नहीं है। इसका महत्व इस बात में है कि लद्दाख के लोगों को उच्च न्यायालय की सुनवाई के लिए अपने क्षेत्र के भीतर एक स्थायी व्यवस्था उपलब्ध होगी।
इससे स्थानीय वकीलों को भी अपने मुवक्किलों की ओर से दलीलें पेश करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच बेहतर होने से दूरदराज के निवासियों की व्यावहारिक कठिनाइयां कम हो सकती हैं।
Location : Leh/Ladakh
Published : 18 October 2026, 6:39 PM IST
Topics : CJI Suryakant Leh Highcourt Leh Ladakh Srinagar