15 साल का इंतजार और बूंद-बूंद को तरसते गले: आखिर क्यों अधूरी रही वो योजना, जिसने ग्रामीणों को आंदोलन के रास्ते पर धकेला?

पश्चिम सिंहभूम के सोनुवा प्रखंड अंतर्गत बनुआ और सोनापोस गांव में 15 साल से अधूरी जलापूर्ति योजना और खराब चापाकलों के कारण पेयजल संकट गहरा गया है। इसके विरोध में ग्रामीणों ने उग्र "पेयजल जन आंदोलन" शुरू कर प्रशासन को एक महीने के भीतर समाधान न होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 20 June 2026, 9:18 AM IST
1 / 5 चाईबासा: पश्चिम सिंहभूम जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित सोनुवा प्रखंड के बनुआ और सोनापोस गांव में इस वक्त पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मचा हुआ है। आजादी के सात दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। पानी के इस भयंकर संकट ने अब एक बड़े "पेयजल जन आंदोलन" का रूप ले लिया है। ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है, क्योंकि गांव के अधिकांश चापाकल पूरी तरह खराब हो चुके हैं और उनसे सिर्फ सूखी हवा निकलती है। इस तपती धूप और गर्मी में ग्रामीण महिलाएं और बच्चे करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर पीने का पानी लाने को मजबूर हैं।
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Location :  Chaibasa

Published :  20 June 2026, 9:18 AM IST