
मासूम बच्चे की पानी में डूबने से असामयिक मौत (Image Source: Pinterest)
Chaibasa: झारखंड के चाईबासा जिले से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाला वाकया सामने आया है। यहाँ झींकपानी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आसुरा गांव के टोला सुरजाबासा में गुरुवार की शाम को एक मासूम बच्चे की पानी में डूबने से असामयिक मौत हो गई। मृत बच्चे की पहचान महज पांच वर्षीय आनंद बिरुली के रूप में हुई है, जो एलकेजी (LKG) का छात्र था। इस खौफनाक हादसे के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और पीड़ित माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
मृतक बच्चे के पिता सुखलाल बिरुली ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि गुरुवार की शाम करीब पांच बजे आनंद अपनी मां अंकिता बिरूली के साथ गांव में ही स्थित एक सरकारी तालाब पर नहाने के लिए गया था। तालाब के किनारे मां कपड़े और खुद को साफ करने में व्यस्त थी, जबकि मासूम आनंद भी पास के पानी में ही खेल रहा था। इसी बीच नहाते-नहाते मां की नजर महज कुछ सेकेंड के लिए बच्चे से हटी। जब मां ने दोबारा मुड़कर देखा तो आनंद वहां गायब था। चीख-पुकार मचने पर दौड़े ग्रामीणों ने पानी में तलाश शुरू की और गहरे दलदल से बच्चे को बेसुध हालत में बाहर निकाला।
मासूम की नाजुक हालत को देखते हुए पिता सुखलाल बिरुली ने ग्रामीणों की मदद से आनन-फानन में एक 'छोटा हाथी' (कमर्शियल वाहन) किराए पर लिया और बच्चे को लेकर सदर अस्पताल चाईबासा भागे। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने आपातकालीन वार्ड में बच्चे को वेंटिलेटर और सीपीआर देकर बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन फेफड़ों में अत्यधिक पानी भर जाने के कारण मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद अस्पताल परिसर चीत्कारों से गूंज उठा।
इस हादसे ने प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसी की घोर लापरवाही को उजागर किया है। मृत बच्चे के पिता और ग्रामीणों का आरोप है कि इस सरकारी तालाब के जीर्णोद्धार का कार्य पिछले दो वर्षों से अधर में लटका हुआ है। इस काम का जिम्मा एक बड़ी निजी कंपनी के पास है, लेकिन उसने तालाब की खुदाई तो कर दी पर आज तक न तो वहां पक्की सीढ़ियां बनाई गईं और न ही सुरक्षित घाट का निर्माण किया गया। मिट्टी धंसने और अचानक गहराई बढ़ने के कारण यहाँ आए दिन मवेशियों के डूबने की घटनाएं भी होती रहती थीं, लेकिन विभाग सोया रहा।
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अतिरिक्त बिंदु (Extra Point): घटना से गुस्साए ग्रामीणों का कहना है कि जब कोई भी सरकारी या निजी निर्माण कार्य अधूरा छोड़ा जाता है, तो नियम के मुताबिक उसके चारों तरफ सुरक्षा घेरा या डेंजर साइन (चेतावनी बोर्ड) लगाना अनिवार्य होता है। इस तालाब के मामले में किसी भी सुरक्षा मानक का पालन नहीं किया गया। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से मांग की है कि अधर में लटके इस प्रोजेक्ट के जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
Location : Chaibasa
Published : 19 June 2026, 2:05 PM IST