क्या है ब्रज की अनोखी होली परंपरा? जानें राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा अनोखा इतिहास

ब्रज की 500 साल पुरानी होली परंपरा आज भी राधा-कृष्ण की लीलाओं की याद दिलाती है। मथुरा, वृंदावन और बरसाना की लठमार व फूलों की होली अब वैश्विक पहचान बन चुकी है। जानिए कैसे बदला इसका स्वरूप और क्या है इसका ऐतिहासिक महत्व।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 18 February 2026, 2:39 PM IST

New Delhi: ब्रज की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आस्था, लोकसंस्कृति और सैकड़ों वर्षों की जीवंत परंपरा का उत्सव है। इतिहासकारों और लोककथाओं के अनुसार यह परंपरा लगभग 500 साल पुरानी मानी जाती है, जिसकी जड़ें राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी हैं। आज भी ब्रज की होली देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है।

लीलाभूमि से लोकपरंपरा तक

ब्रज क्षेत्र खासकर Mathura, Vrindavan और Barsana को भगवान कृष्ण की लीलाभूमि माना जाता है। मान्यता है कि यहीं कृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ फाग खेली। इसी कथा से प्रेरित होकर फाग, रसिया और लठमार होली की परंपरा विकसित हुई। बरसाना की लठमार होली में महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से लाठियों से पुरुषों को मारती हैं, जबकि पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। इसे राधा-कृष्ण की प्रेमपूर्ण नोकझोंक का प्रतीक माना जाता है।

परंपरागत रंग और रस्में

ब्रज की होली कई दिनों तक चलती है और हर दिन का अपना अलग महत्व होता है।

  • मंदिरों में फूलों की होली
  • रासलीला और भजन-कीर्तन
  • ढोल-चंग पर फाग गायन
  • प्राकृतिक गुलाल और रंगों का प्रयोग

Banke Bihari Temple में मनाई जाने वाली फूलों की होली और विधवाओं की होली ने वैश्विक पहचान बनाई है। इन आयोजनों में भक्तों पर फूल बरसाए जाते हैं और पूरा वातावरण भक्ति रस में डूब जाता है।

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आज का स्वरूप: परंपरा के साथ आधुनिक प्रबंधन

समय के साथ ब्रज की होली का स्वरूप भी बदला है। अब यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक और पर्यटन महोत्सव बन चुका है।

  • देश-विदेश से लाखों पर्यटक
  • कड़ी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन
  • ट्रैफिक नियंत्रण और विशेष व्यवस्था
  • सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण

स्थानीय होटल, गेस्ट हाउस और बाजारों में इस दौरान भारी कारोबार होता है। प्रशासन विशेष व्यवस्थाएं करता है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित अनुभव मिल सके।

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परंपरा और आधुनिकता का संगम

जहां सदियों पुरानी रसिया, लठमार और फाग की परंपरा आज भी जीवंत है, वहीं आधुनिक तकनीक और वैश्विक पहचान ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। ब्रज की होली आज भी अपनी मूल भावना प्रेम, भक्ति और उल्लास को संजोए हुए है, बस उसका दायरा पहले से कहीं ज्यादा बड़ा हो चुका है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 18 February 2026, 2:39 PM IST