
भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल की जोड़ी(Source: Google)
New Delhi पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक विजय में 'मोदी मैजिक' निस्संदेह एक बड़ा फैक्टर रहा है, लेकिन बंगाल जैसी कठिन परिस्थितियों में संगठन के जमीनी संघर्ष और परिश्रम की भी कड़ी परीक्षा थी। इस जीत के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मास्टर रणनीति के साथ-साथ उनके दो भरोसेमंद सिपहसालारों- भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल की जोड़ी का सबसे अहम योगदान माना जा रहा है।
भूपेंद्र यादव का ट्रैक रिकॉर्ड पार्टी नेतृत्व के उन पर भरोसे को पुख्ता करता है। उन्होंने 2022 में गुजरात, 2023 में मध्य प्रदेश और 2024 में महाराष्ट्र में सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को बेअसर कर भाजपा की सत्ता में वापसी कराई। इतना ही नहीं, 2024 में ओडिशा में भाजपा की पहली सरकार बनवाने का श्रेय भी काफी हद तक उन्हीं के खाते में जाता है। अब बंगाल में उन्होंने अपनी संगठनात्मक क्षमता का लोहा मनवाया है।
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उत्तर प्रदेश में भाजपा के अभेद्य किले के निर्माण में सुनील बंसल की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उन्हें तेलंगाना, ओडिशा और बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बंगाल में उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया। सुनील बंसल और भूपेंद्र यादव की जोड़ी ने 2021 की हार की कड़वी समीक्षा की और उन खामियों को दूर किया जिसने पिछली बार भाजपा को सत्ता से दूर रखा था।
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इस जीत की पटकथा अमित शाह के मार्गदर्शन में लिखी गई, जिन्होंने खुद बंगाल में डेरा डाले रखा। शाह के निर्देश पर यादव और बंसल ने संगठन के भीतर की गुटबाजी को खत्म किया और हर एक बूथ पर सशक्त कार्यकर्ताओं की टोली खड़ी की। इसी जमीनी किलाबंदी का परिणाम रहा कि इस बार भाजपा ने बंगाल में ऐतिहासिक बहुमत हासिल कर सरकार बनाई है।
Location : New Delhi
Published : 5 May 2026, 6:49 AM IST