Air India Flight Hijack Alert: ATC सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी या कॉकपिट की चूक? एजेंसियां कर रही हैं जांच

फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट में झूठा हाईजैक अलर्ट मिलने से हड़कंप मच गया। प्रोटोकॉल के तहत विमान को जयपुर डायवर्ट कर जांच की गई, जहां सब सामान्य मिला। अब सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह तकनीकी सॉफ्टवेयर की गलती थी या मानवीय चूक।

Updated : 16 October 2026, 9:04 AM IST
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New Delhi: हाल ही में एअर इंडिया के एक विमान को लेकर खड़े हुए बड़े सुरक्षा संकट ने विमानन जगत में हलचल मचा दी है। फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की एक उड़ान को अचानक हाईजैक होने के भ्रम के चलते जयपुर की तरफ मोड़ना पड़ा। बोइंग 787-9 विमान में इस दौरान करीब 300 यात्री और क्रू मेंबर सवार थे। यह घटना तब घटी जब विमान भारतीय एयरस्पेस में दाखिल हुआ। वर्तमान में पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण भारतीय विमानों को लंबे और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे यह फ्लाइट भी एक लंबे रूट से आ रही थी। इसी दौरान मुंबई एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को इस विमान से ट्रांसपोंडर कोड '7500' प्राप्त हुआ, जिसे विमानन क्षेत्र में हाईजैकिंग या किसी गैर-कानूनी खतरे का संकेत माना जाता है।

जांच में क्या मिला?

सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों और तय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, जैसे ही मुंबई एटीसी को यह कोड मिला, विमान को तुरंत डायवर्ट कर जयपुर एयरपोर्ट पर उतारा गया। जयपुर में विमान को एक अलग और सुरक्षित दूर के बे पर खड़ा किया गया। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने विमान में सवार सभी यात्रियों, उनके सामान और एयरक्राफ्ट की बेहद बारीकी से गहन जांच की। राहत की बात यह रही कि जांच के दौरान सब कुछ पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य पाया गया। स्थिति स्पष्ट होने के बाद, उसी क्रू मेंबर टीम के साथ विमान को दिल्ली के लिए दोबारा उड़ान भरने की हरी झंडी दे दी गई, जो इस लंबी यात्रा के इस चरण को संभाल रहे थे।

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मानवीय भूल या तकनीकी खामी?

इस पूरी घटना के सामने आने के बाद अब एविएशन और सुरक्षा एजेंसियां इस बात की तह तक जाने में जुटी हैं कि आखिर यह फर्जी अलर्ट कैसे और क्यों जनरेट हुआ। क्या यह मुंबई एटीसी के सिस्टम की कोई तकनीकी गड़बड़ी थी या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण था? इस संदर्भ में जब सीनियर बोइंग पायलटों से बात की गई, तो उनका साफ कहना था कि कॉकपिट में अनजाने में या गलती से कोड 7500 सेट होने की संभावना 'खरबों में एक' है। पायलटों के मुताबिक, इस कोड के हर एक अंक को मैन्युअली (हाथ से) फीड करना पड़ता है। विमान में ऐसा कोई भी सिंगल बटन नहीं होता जिसे किसी गलती से दबाया जा सके। इसलिए कॉकपिट या पायलट की तरफ से ऐसी किसी भूल की गुंजाइश लगभग न के बराबर है।

सिस्टम पर सवाल और आगे की जांच

दूसरी ओर, इस मामले पर सीनियर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि मुंबई एटीसी के पास एक अत्याधुनिक नया सिस्टम मौजूद है, ऐसे में इस पूरे मामले में एटीसी के सॉफ्टवेयर की तरफ से किसी गलती के होने की संभावना बेहद कम है।

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अधिकारियों के अनुसार, जब भी कोई विमान कोड 7500 (हाईजैक) का उपयोग करता है, तो रडार स्क्रीन पर उस विमान का डॉट तुरंत लाल रंग में बदल जाता है और कंट्रोल रूम में खतरे के सायरन बजने लगते हैं। इसके अलावा, अन्य आपातकालीन स्थितियों के लिए कोड 7600 (कम्युनिकेशन फेलियर) और कोड 7700 (सामान्य इमरजेंसी) का प्रावधान होता है। फिलहाल, यह उच्च स्तरीय जांच का विषय बना हुआ है कि जब पायलटों ने ऑपरेशन के सामान्य होने की बात कही थी, तब रडार पर यह हाईजैक अलर्ट कैसे फ्लैश हुआ। सुरक्षा एजेंसियां सभी तकनीकी पहलुओं को खंगाल रही हैं ताकि भविष्य में इस तरह की भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।

Location :  New Delhi

Published :  16 October 2026, 9:04 AM IST

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