
आईआईटी मंडी
नई दिल्ली: देश में अज्ञात शवों की पहचान करना पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के लिए बड़ी चुनौती है। इस समस्या से निपटने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी के शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित एक नया मॉडल विकसित किया है। स्पॉटफेस (SpotFace) मॉडल खोपड़ी के एक्सरे और चेहरे की तस्वीरों का विश्लेषण करके संभावित मेल वाले चेहरों की सूची तैयार कर सकता है। इससे जांचकर्ताओं को अज्ञात शवों की पहचान के लिए संदिग्धों और संभावित पहचान के दायरे को सीमित करने में मदद मिल सकती है।
यह शोध IIT मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विजन इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग समूह में किया गया है। पीएचडी शोधार्थी रवि शंकर प्रसाद ने सहायक प्रोफेसर डॉ. दिनेश सिंह के मार्गदर्शन में इस मॉडल पर काम किया। शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय पैटर्न रिकग्निशन सम्मेलन (ICPR) 2026 की शोध कार्यवाही में प्रकाशित हुआ है।
स्पॉटफेस मॉडल को खोपड़ी के एक्सरे और उनसे संबंधित चेहरे की तस्वीरों के उदाहरणों से प्रशिक्षित किया गया है। यह दोनों तरह की तस्वीरों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उनके आकार, बनावट और आपसी संबंधों का विश्लेषण करता है।
इसके बाद AI मॉडल खोपड़ी और चेहरे की तस्वीरों में मौजूद विशेषताओं के बीच समानताएं तलाशता है। विश्लेषण के आधार पर यह संभावित चेहरों को प्राथमिकता के क्रम में रखता है, ताकि फॉरेंसिक विशेषज्ञ सबसे संभावित विकल्पों की पहले जांच कर सकें।
इस प्रक्रिया में ग्राफ न्यूरल नेटवर्क (GNN), क्रॉस-अटेंशन और ऑप्टिमल ट्रांसपोर्ट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इनका उद्देश्य खोपड़ी और चेहरे की तस्वीरों में संबंधित विशेषताओं के बीच बेहतर मेल स्थापित करना है।
शोधकर्ताओं ने IIT मंडी के भारतीय खोपड़ी-चेहरा डेटासेट पर मॉडल का परीक्षण किया। इस डेटासेट में खोपड़ी के एक्सरे और संबंधित चेहरे की तस्वीरों की 102 जोड़ियां शामिल थीं।
परीक्षण के दौरान मॉडल के नतीजे इस प्रकार रहे:
इन परिणामों से पता चलता है कि मॉडल संभावित पहचान के विकल्पों को प्राथमिकता देने में मदद कर सकता है। हालांकि, भारतीय डेटासेट पर परीक्षण का आकार सीमित था, इसलिए बड़े और विविध डेटासेट पर इसके प्रदर्शन का आकलन करना जरूरी है।
शोधकर्ताओं ने चीनी चेहरों के स्केच और तस्वीरों के 188 जोड़ों वाले डेटासेट पर भी मॉडल का परीक्षण किया। इसमें सही चेहरे को पहली रैंक पर रखने की दर 88.4 प्रतिशत रही, जबकि 89 प्रतिशत मामलों में सही चेहरा शीर्ष पांच विकल्पों में शामिल था।
भारतीय खोपड़ी-चेहरा डेटासेट और चीनी स्केच-फोटो डेटासेट के परिणामों में अंतर देखा गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, खोपड़ी और चेहरे के बीच मिलान करना स्केच और चेहरे की तस्वीरों की तुलना करने से अधिक चुनौतीपूर्ण है।
यह अंतर बताता है कि मॉडल का प्रदर्शन इस बात पर भी निर्भर करता है कि तस्वीरों के प्रकार क्या हैं और उनके बीच समानताओं का विश्लेषण कितना जटिल है।
इस परियोजना पर काम अगस्त 2023 में शुरू हुआ था। शोधपत्र का प्रारंभिक संस्करण 14 जनवरी 2026 को आर्काइव पर जारी किया गया था। अब शोधकर्ता मॉडल की सटीकता बढ़ाने और बड़े डेटासेट पर इसकी क्षमता का परीक्षण करने में जुटे हैं।
इस दिशा में आगे का शोध यह समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा कि अलग-अलग आबादी, चेहरे की विविधता और सीमित गुणवत्ता वाले फॉरेंसिक साक्ष्यों के मामलों में यह तकनीक कितनी प्रभावी रहती है।
पारंपरिक फॉरेंसिक तरीकों में विशेषज्ञ खोपड़ी की संरचना के आधार पर चेहरे की संभावित आकृति का पुनर्निर्माण कर सकते हैं। यह प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है और इसमें विशेषज्ञों की भूमिका अहम होती है।
स्पॉटफेस मॉडल संभावित चेहरों की सूची तैयार करके जांच को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकता है। इससे पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को उपलब्ध तस्वीरों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच के लिए संभावित विकल्प चुनने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि, यह तकनीक अभी अज्ञात शवों की पहचान की पुष्टि करने वाला स्वतंत्र विकल्प नहीं है। इसके नतीजों को अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के साथ मिलाकर देखना होगा। मॉडल की वास्तविक उपयोगिता स्थापित करने के लिए बड़े स्तर पर परीक्षण और सटीकता में सुधार जरूरी है।
Location : New Delhi
Published : 10 October 2026, 9:46 AM IST
Topics : AI Forensic Technology IIT Mandi AI Model SpotFace Model Unknown Dead Bodies Identification